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ग्राउंड रिपोर्ट: पीएम आवास से टूटी आस, फाइलों पर जमीं गर्द तो खुले में बीत रही गरीबों की रातें सर्द

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मकान के लिए लाई चोखट और अधर में पड़ा मकान दिखाता दादरी गेट ढाणा रोड गली नंबर चार निवासी अमर सिंह। - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना से अब गरीबों की आस टूट रही है। मकान बनाने के स्वीकृत आवेदनों पर गर्द (धूल) जमीं है तो गरीबों की सर्द रातें भी खुले में ही बीत रही हैं। नगर परिषद ने अब प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के स्वीकृत 1764 आवेदनों को रद्द करने की तैयारी भी कर ली है। इनमें दस्तावेज जमा नहीं हुए हैं। करीब एक हजार गरीब परिवार ऐसे हैं, जिनके सिर से पुरानी छत छीन गई हैं वे केवल एक तिरपाल के सहारे सर्द रातें ईंटों के सहारे अस्थायी बसेरे में पूरे परिवार के साथ बीता रहे हैं, जहां न रसोई है न शौचालय। उनकी जिंदगी खानाबदोश से कम नहीं है। 2017 में शुरू हुई प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में अब तक केवल एक हजार गरीबों को ही खुद के आशियाना नसीब हुआ है, जबकि भिवानी शहर में 3811 पात्र परिवारों के आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं। पांच साल से एक हजार पात्र परिवारों को सिर पर छत का इंतजार है।
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भिवानी नगर परिषद के 31 वार्डों में 2017 में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने के लिए सर्वेक्षण कराया था। सर्वेक्षण के बाद शहरी दायरे में 3811 पात्र परिवारों की पहचान हुई थी। जिन्हें मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये व रिपेयरिंग के लिए डेढ़ लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया था। लेकिन पिछले पांच साल से पात्र परिवार दस्तावेजों के जाल में ऐसे उलझे की उनके सिर से पुरानी छत भी छीन गई और नया आशियाना भी नहीं मिला। इन पांच सालों में सिर्फ एक हजार पात्र परिवार ऐसे रहे, जिन्हें तीनों किस्तों का भुगतान हो पाया और वे जैसे-तैसे सिर पर छत बना पाए। अब ताजा हालातों पर नजर डालें तो करीब एक हजार पात्र परिवार अब भी बिना छत, पीएम आवास की बाट जोह रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्ट में दादरी गेट ढाणा रोड क्षेत्र के लोगों के हालात देखे तो दंग रह गए। यहां सिर पर न छत थी, न ठीक से रहने का कोई ठिकाना, बस कुछ ईंटों को बिना चिनाई किए दीवार बनाकर उस पर तिरपाल तान लोग रहने को मजबूर दिखे। इस हाल में रहने वालों का कहना था कि उन्हें अब तक एक किस्त मिली थी, जिससे नींव भर दी गई। मगर मकान का ढांचा खड़ा करने के लिए कोई पैसा नहीं मिला। महंगी निर्माण सामग्री की वजह से खुद मकान बनाने की हैसियत नहीं है। सरकार से भी आगे की किस्त नहीं मिली हैं। कार्यालयों के चक्कर काट काट थक चुके हैं। गर्मी और बारिश का मौसम तो जैसे तैसे बीत गया अब पूरी सर्दी भी इसी हाल में गुजरेगी।
मकान के लिए ढाई लाख रुपये पास हुए थे। एक किस्त मिली थी, जिसमें मकान की नींव भर दी। आगे की किस्तों का भुगतान नहीं किया। एक कोने में तिरपाल तानकर पूरा परिवार रहने को मजबूर हैं, न रसोई है न शौचालय। कितने दिन ऐसे रहेंगे। कोई सुनने वाला व देखने वाला नहीं है।
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- कांता देवी
मैं विधवा महिला हूं, मेरे दो बच्चे हैं। मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर करते हैं। पीएम आवास योजना में नाम आया तो सिर पर छत मिलेगी, इस आस से मकान बनाना शुरू किया था, लेकिन एक किस्त के बाद कोई पैसा नहीं मिला। अब सर्दी के मौसम में सिर पर न छत है न रहने का कोई ठिकाना।
- चंद्रपति
मैंने पीएमएवाई के लिए आवेदन किया था। काफी दिन तक चक्कर लगाता रहा तब जाकर एक किस्त मिली थी। अब आगे का भुगतान के लिए काफी बार चक्कर काट चुका हूं। न मकान बन पा रहा है न रहने के लिए ठीक से जगह का प्रबंध, बुरे हालातों में जी रहे हैं।
-सत्यवान
पीएमएवाई के मकान के लिए चौखट व अन्य निर्माण सामग्री इस आस में लेकर आया था कि मकान बन जाएगा, मगर सरकार की योजना में ऐसे फंसे की मकान नहीं बन पाया। पहले छत थी वह भी छीन गई। अब घर के नाम पर यहां सामान बिखरा पड़ा है। किराये पर रहने पर मजबूर हो गए हैं।
- अमर सिंह
शहर में 3811 पात्र परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ दिया जाना है। इसमें से 1764 आवेदकों को चार बार नोटिस दिए जाने के बाद भी कोई दस्तावेज जमा नहीं कराया गया। ऐसे आवेदनों को अब रद्द किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं एक हजार पात्र परिवारों की किस्तें बकाया है, जिन्हें जारी किया जा रहा है। जिन पात्र परिवारों के दस्तावेजों में कोई दिक्कत नहीं है, उन्हें बिना किसी देरी के योजना का लाभ मिल रहा है।
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- अशोक कुमार दांगी, नोडल अधिकारी, पीएमएवाई एवं सचिव नगर परिषद भिवानी।
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