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शहर में 37 जगहों पर जली होलिका

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नेहरू पार्क में होलिका पूजन करती महिलाएं । संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
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छोटी काशी में होली धूमधाम से उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने व्रत रखकर होली पूजन किया व संतान की दीर्घायु की प्रार्थना की। वहीं महिलाओं ने खेतों में तैयार हुई नई फसल गेहूं, चने, जौ का भोग लगाया और अच्छी फसल की कामना की गई। गोबर से बने ढाल-बिड़कुले और नाल से भी पूजा कर प्राचीन परंपराओं के अनुसार परिक्रमा की गई। शहरभर में 37 जगह होलिका का पूजन किया गया। वहीं देर शाम शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया।
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पूजन करने पहुंची महिलाओं का कहना था कि जिस तरह प्रह्लाद की रक्षा भगवान ने की उसी तरह उनके बच्चों की रक्षा की कामना के लिए होलिका पूजन किया जाता है और व्रत रखा जाता है। यही नहीं होली की विधिवत पूजा के साथ-साथ नाल के धागे को रक्षा सूत्र के रूप में भी होलिका पर बांधा जाता है। हमने कामना की है कि भगवान किसानों के अन्न भंडार को भरा रखे और देश में अमन शांति बनी रहे।
शहर के नेहरू पार्क, खाकी बाबा मंदिर के पास, नया बाजार में भोजावाली माता मंदिर से आगे, कृष्णा कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड, सेक्टर 13, बैंक कॉलोनी, विकास नगर, हनुमान ढाणी, दादरी गेट, कन्हीराम अस्पताल के पास, विद्या नगर, बीटीएम चौक के पास, जागृति कॉलोनी आदि क्षेत्रों में होलिका पूजन हुआ। यहां दिनभर मेला लगा रहा। बच्चों ने खिलौने और खाद्य पदार्थ खरीदे।
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कहीं रंग में भंग न डाल दे केमिकल कलर
बाजार में केमिकल युक्त रंगों की भरमार है। जो शरीर खासकर आंखों और स्किन को काफी नुकसान पहुंचा सकते है। इन दिनों सस्ते केमिकल युक्त रंग की बाजार में भरमार है और काफी रंगों में पीसा हुए कांच का भी प्रयोग किया जा रहा है। रंगों के त्योहार में भंग न पड़े इसके लिए सावधानी जरूरी है। सामान्य अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. कृष्ण कुमार ने इसके लिए जरूरी सलाह दी।
आंखों और स्किन के लिए घातक है केमिकल वाले रंग
1. होली खेलते समय आंखों के अंदर रंग जाने का सबसे अधिक खतरा रहता है। आंखों में रंग जाने से जलन होना और लाल होना सामान्य बात है। इसके अलावा केमिकल से बना रंग आंखों के अंदर जाने से रोशनी भी जा सकती है।
2. केमिकल युक्त रंग त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। रंग लगने के बाद खुजली पड़ना, दाग पड़ जाना और सूजन आना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। वहीं, स्किन कैंसर का खतरा बना रहता है।
3. सूखा रंग सांस और दमे जैसी बीमारियों को जन्म देता है। सूखा रंग हवा में मिलकर आपके नाक और मुंह के जरिए शरीर के अंदर पहुंच जाता है। जो कि दमा और सांस जैसी बीमारियों को जन्म देता है।
4. बाजार में बिक रहे केमिकल से बने रंग बालों को प्रभावित करते हैं। बालों में रंग लगने के बाद बाल झड़ने, डैंड्रफ जैसी कई समस्याएं होती है।
बचाव
1. होली में इस्तेमाल होने वाले रंगों में मेटल ऑक्साइड मिला होता है, जो बालों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए रंग खेलने से पहले बालों पर नारियल या सरसों का तेल लगा लें।
2. होली में रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल लगा लें। जिससे रंग ज्यादा देर तक शरीर पर नहीं टिकेगा। इसके अलावा कान, नाक, आंख के आसपास वैसलीन लगा लें। ऐसा करने से हानिकारक रंग त्वचा के अंदर नहीं जा पाएंगे।
3. होली में लगे रंग को उतारने के लिए लोग अक्सर गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं, जबकि इससे तो रंग और ज्यादा पक्का हो जाता है। इसके अलावा स्किन भी सूख जाती है। इसलिए हमेशा रंग छुड़ाने के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।
4. कई बार लोग रंग छुड़ाने के लिए केरोसिन ऑयल, पेट्रोल आदि का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करने से शरीर पर दाने निकल सकते हैं। रंग छुड़ाने के लिए घर में बना बेसन का पेस्ट का प्रयोग सबसे बेहतर है।
ये रखे होली खेलते समय सावधानी
- प्राकृतिक रंगों यानी नेचुरल कलर्स का इस्तेमाल करें।
- पूरी बांह यानी फुल स्लीव्स के कपड़े पहने
- रंगों में भीगने से पहले शरीर पर तेल लगाएं। ऐसा ही बालों के लिए भी करें। बेहतर होगा कि नारियल तेल का इस्तेमाल किया जाए। इससे रंग आपकी स्किन को नुकसान नहीं होगा
- ज्यादा गहरे रंगों के इस्तेमाल से बचे
- होली खेलने के बाद या दौरान अगर त्वचा में जलन हो, आंखों में धुंधलापन या खुजली हो या फिर सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
- बहुत देर तक पानी में न रहें। बच्चों का ध्यान इस मामले में ज्यादा रखें।
- कान में भी पानी न जाने दें। केमिकल वाले कलर्स का पानी आपके कान को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

नेहरू पार्क में होलिका दहन करते हुए। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : Bhiwani

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