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भ्ाले 43 डिग्री पर तपे भिवानी

Sun, 23 Apr 2017 12:45 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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भिवानी। इस साल अप्रैल में ही गर्मी कहर बरपाने लगी है। इतने विकट मौसम के बावजूद सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल के इंतजाम न के बराबर हैं। जिला अस्पताल से लेकर सचिवालय, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर आमजन को हलक तर करने वास्ते बूंद-बूंद के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। कहीं पानी नहीं है तो कहीं ऐसा कि पीने से तबीयत बिगड़ जाए। हर रोज चार हजार मरीज व तीमारदारों की आवाजाही वाले जिला अस्पताल की हालात से सबसे ज्यादा खराब है। ज्यादातर वार्डों में पानी के न के बराबर इंतजाम हैं। मरीजों को पानी खरीदना पड़ता है या फिर अपने घर से मंगवाना पड़ रहा है। इमरजेंसी व ओपीडी में पानी की व्यवस्था नहीं है।
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सामान्य अस्पताल:
सामान्य अस्पताल में पानी की किल्लत से अनुमानित चार से पांच हजार मरीज व तीमारदार परेशान हैं। सभी आठ वार्डों में पेयजल संकट बना है। वार्ड तीन में पानी है, मगर वह ज्यादा ठंडा नहीं है। बावजूद इसके लोग प्यास बुझा रहे हैं। जच्चा-बच्चा वार्ड, वार्ड चार, छह, इसके बाद ऊपर के अन्य वार्डों, प्राइवेट वार्डों में पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। मरीज व उनके तीमारदार पानी के लिए भूतल पर ब्लड बैंक के पास लगी टंकी का प्रयोग कर रहे हैं। यहां भी पानी ठंडा नहीं है मगर लोग प्यास बुझाने के लिए पी रहे हैं। अनेक लोग बाजार से पानी की बोतल खरीदने को मजबूर हैं तो काफी लोग अपने घरों से पानी ला रहे है। वार्डों ही नहीं ओपीडी, इमरजेंसी के पास भी पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। टीबी विभाग के बाहर एक वाटर कूलर लगा है मगर ज्यादा लोग आने के कारण दोपहर तक वह भी जवाब दे जाता है।

कोर्ट परिसर अधिवक्ता कॉम्पलेक्स:
कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के लिए बनाए गए भवनों के पास भी पेयजल संकट बना हुआ है। पुराने कोर्ट कॉम्पलेक्स हो या नए पेयजल की कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। तीनों ही भवनों में पेयजल संकट है। पुराने कॉम्पलेक्स के पास पानी की टंकी लगी है मगर वहां गर्म पानी है। इसी के प्रथम तल पर पानी की दान की हुई टंकी है। जिसमें ठंडा पानी है और लोग यहीं से पानी बोतलों में भरकर ले जाते हैं।
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बस स्टैंड परिसर:
बस स्टैंड परिसर में भी पेयजल संकट है। यहां बसों के एंट्री गेट के पास समाज सेवियों द्वारा बड़ी पानी की टंकी बनाई हुई है। इसमें पानी ज्यादा ठंडा तो नहीं है मगर लोग इसी से प्यास बुझा रहे हैं। बस स्टैंड परिसर में अन्य कहीं भी पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है।

लघु सचिवालय :
लघु सचिवालय जहां अधिकारी दिनभर रहते हैं। दिनभर लोगों का भी आवागमन रहता है। यहां पानी की तीन टंकियां हैं मगर पानी एक में ही पीने लायक है। ई-दिशा केंद्र में हजारों लोग डोमिसाइल, आरसी, लाइसेंस के लिए आते हैं, मगर यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं। ई-दिशा केंद्र के पास ही एडीसी कार्यालय की ओर जाने वाली गैलरी है। यहां वाटर कूलर तो है मगर इसमें पानी नहीं। सिटीएम कार्यालय के पास भी पानी की टंकी है मगर पानी गर्म है। सिर्फ उपायुक्त कार्यालय के पास लगी टंकी में ही पानी पीने लायक है।

सरकारी स्कूल:
शहर के सरकारी स्कूलों खासकर प्राइमरी स्कूलों में भी बच्चे टंकियों का गर्म पानी पीने को मजबूर हैं। दादरी गेट धर्मशाला में चल रहे प्राइमरी स्कूल, हनुमान ढाणी प्राइमरी स्कूल, बिचला बाजार स्थित प्राइमरी स्कूल समेत विभिन्न स्कूलों में पीने के पानी के लिए प्लास्टिक की टंकियां रखवाई गई हैं। जिनमें गर्म पानी है। कुछ जगह सीमेंट की बनी हुई पुरानी टंकियां हैं।

पानी की किल्लत, तीमारदारों की जुबानी
जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर पानी की खाली टंकी के पास पानी के लिए पहुंचे महम वासी अनिल कुमार ने बताया कि टंकी तो खाली है। यहां पानी कहां मिलेगा। सब जगह घूम लिया मगर पीने को पानी नहीं मिला। वार्ड पांच में पानी के लिए भटक रहे दादरी गेट वासी सचिन ने बताया कि अनेक वार्डों में गया, मगर पीने को पानी ही नहीं है। मित्ताथल गांव से आई महिला कलावती ने बताया कि पुत्रवधू भर्ती है। यहां इतना बड़ा अस्पताल है मगर पीने के लिए पानी नहीं है। महम से आई महिला बीरमति ने बताया कि सुना था कि भिवानी अस्पताल में सभी सुविधाएं मिलती हैं। इसी लिए यहां आए। मगर यहां तो पीने का पानी ही नहीं मिल रहा। बाहर से बोतल भरकर लाना पड़ता है।
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