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हरियाणा का मुर्राह बना देश की शान: बोहर रोहतक के देसी शेरू के सीमन से यूएसए में भी सुधरी विदेशी भैंसों की नस्ल

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संजय वर्मा
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भिवानी। हरियाणा मुर्राह नस्ल के लिए जाना जाता है। इसके नाम का डंका तो देश के अन्य राज्यों में ही नहीं, बल्कि यूएसए जैसे विकसित देशों में भी बज रहा है। रोहतक जिले के बोहर गांव के देसी शेरू के सीमन ने विदेशी भैंसों की नस्ल भी सुधार दी है।
यूएसए के पशु वैज्ञानिकों ने शेरू की सीमन से यूएसए में करीब मुर्राह नस्ल के 600 कटड़े कटड़ियों की तादाद कर ली है। शेरू के बेटे बादल, राका और टाइसन ने तो बोहर के पशु पालक देवेंद्र कोच को ही मुर्राह रतन अवॉर्ड दिला दिया। वहीं मेले में आए मुर्राह झोटा की सेहत का राज ताज के सेब, बादाम और काजू की विशेष खुराक है। हरियाणा के मुर्राह के तो विदेशी वैज्ञानिक भी कायल हैं।
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भिवानी में शुक्रवार को शुरू हुए राज्य स्तरीय पशु मेले में प्रदेश भर से पशु पालक अपने-अपने पशुओं को लेकर पहुंचे हैं। मेले में पहले ही दिन इतने पशु आ गए, जिसकी वजह से सभी को हाट के टोकन तक नहीं मिले। अधिकतर पशु पालक निर्माणाधीन कन्या स्कूल भवन के आसपास ही अपने पशुओं को खुले में लेकर डेरा डालने पर मजबूर हो गए। बोहर निवासी देवेंद्र कोच ने बताया कि 2014 में शेरू मुर्राह झोटे के सीमन का दो हजार स्ट्रो सीआईआरबी के माध्यम से यूएसए भेजा गया था। जिसके अब वहां 600 से अधिक कटड़े और कटड़ियां हैं। शेरू का बादल साढ़े पांच साल का वयस्क मुर्राह झोटा है। जिसका हर माह 12 से 14 लाख रुपये का सीमन बिक जाता है। अब तक 70 लाख रुपये का सीमन बिक चुका है। जिसकी कीमत भी करीब ढाई करोड़ आंकी जा रही है। बादल 2020 और 2021 हरियाणा ब्रिड चैंपियन का खिताब अपने नाम कर ढाई लाख का ईनाम अपने नाम कर चुका है। बादल का बेटा सूर्या दो साल दो माह का है, यह भी मेले में पिता के साथ आया है। देवेंद्र ने बताया कि उसके पास करीब 60 मुर्राह पशु हैं। उसे सोनीपत के गन्नौर में चौथी एग्रो लीडरशिप सीमेंट में राष्ट्रपति के हाथों मुर्राह रतन अवॉर्ड भी मिल चुका है। उसने मुर्राह ब्रीडिंग पर 36 साल तक रिसर्च किया है। अब तक उसकी 225 भैंसें दुग्ध प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। शेरू का बेटा टाइसन तीन बार ब्रीड चैंपियन रह चुका है। राका भी पंजाब में धूम मचा चुका है। बादल के सीमन से हर माह 12 से 14 लाख की कमाई हो जाती है।
शैतान गधे की शैतानी से हो रहा मनोरंजन
मेले में गधा शैतान भी आया है, उसकी शैतानी मेले में भी सभी का मनोरंजन कर रही है। गांव तिगड़ाना के रामभगत ने बताया कि शौतान नौ साल का है, उसकी ऊंचाई 60 इंच है। उसे घोड़ी और गधी से क्रॉसिंग कराई जाती है। रामभगत ने उसे मेले में छोटे बच्चे के तौर पर ढाई लाख रुपये में खरीदा था। अब उसकी कीमत दस लाख से अधिक है।
शेरू बकरे के कुनबे का लगा मेला
मेले में लोहारू लक्ष्मी गॉट फार्म के संचालक रघुवीर ने बताया कि सोजत हैदराबादी ब्रीड का बकरा शेरू खूबसूरती के लिए मशहूर है। उसे अहमदाबाद से सवा लाख में खरीदकर लाया था। उसका अब पूरा कुनबा है। उसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
ताज की सेहत का राज
दादरी के लोहड़वाड़ा के पशुपालक कुलदीप फौगाट ने बताया कि 25 माह का मुर्राह झोटा ताज पंजाब में प्रथम आ चुका है। आठ माह बाद उसका सीमन बिक्री लायक हो जाएगा। उसे रोजाना दस किलो दूध, पांच किलो सेब, आधा किलो बादाम व आधा किलो सप्ताह में काजू खिलाता हूं। उसकी चमक बरकरार रखने के लिए रोजाना मालिश होती है।
राका डोब का 20 लाख में बिक रहा हर माह सीमन
रोहतक के डोब निवासी रवींद्र ने बताया कि राका डोब का सीमन हर माह 20 लाख रुपये में बिक जाता है। तीन साल दो माह के इस मुर्रा झोटे की कीमत एक करोड़ से अधिक है।
मंगल की रफ्तार का नहीं मुकाबला
चेतक घोड़े की तरह ही डेरा कारी मेला इंदोखरा धाम के महंत राकेश गिरी महाराज का सफेद रंग का घोड़ा मंगल है। उसकी रफ्तार का कोई मुकाबला नहीं है। उसे देखने के लिए भी काफी लोगों की भीड़ जुट रही है।
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बेटी गौरी के साथ आई लक्ष्मी
मेले में खेड़ी सांपला निवासी विजयपाल की बछड़ी गौरी अपनी मां लक्ष्मी के साथ आई है। उसके साथ हरियाणा नस्ल के नंदी भोला और शिवा भी है। ये सूखा इलाके में भी अच्छा दूध देने के लिए जानी जाती है।

मुर्राह वयस्क झोटा बादल के साथ मुर्राह रत्न अवॉर्डी देवेंद्र कोच बोहर। संवाद- फोटो : Bhiwani

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