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भिवानी, तोशाम, लोहारू, सिवानी में पीने लायक नहीं भूमिगत जल

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मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब। - संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
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भिवानी, तोशम, लोहारू, सिवानी का भूमिगत जल पीने लायक नहीं है। इसमें टीडीएस, हार्डनेस, फ्लोराइड की मात्रा तीन गुणा तक ज्यादा है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि एक जनवरी से शुरू हुई मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के शुरूआती नतीजों में सामने आया है। 37 सैंपल लिए गए थे। इसमें बवानीखेड़ा का ही भूमिगत जल पीने लायक मिला। पानी इतना खराब है कि कैंसर, पीलिया, बाल झड़ना, हड्डियां कमजोर होना आदि खतरनाक बीमारियों का खतरा है। अनेक लोग तो इन बीमारियों में चपेट में भी है।
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नव वर्ष पर एक जनवरी से स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब ब्लॉक, गांव वाइज पहुंचकर सैंपलों की जांच कर रही है। महज 20 रुपये में कोई भी अपने खाद्य पदार्थों की जांच करा सकता है। मोबाइल लैब जहां भी जाती है, कर्मचारी वहां के जमीन के पानी की जरूर जांच कर रहे हैं। खासकर भिवानी में क्योंकि यहां अधिकतर लोग पीने में जमीन के पानी का ही प्रयोग करते हैं। टीम ने 10 दिन की जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों पर 37 सैंपलों की जांच की।
हैरान करने वाली बात यह है कि भिवानी, लोहारू, सिवानी, तोशाम से लिए जमीन के पानी के सैंपलों की रिपोर्ट बहुत खतरनाक आई है। ये पानी किसी भी सूरत में पीने लायक नहीं है। टीडीएस की मात्रा तीन गुणा तक अधिक है तो फ्लोराइड, हार्डनेस भी खतरनाक स्तर पर है।
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टीडीएस की वजह से हो रहा है पानी प्रभावित : मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब टीम के अनुसार पानी में पीपीएम 200 से 400 की मात्रा होनी चाहिए मगर जिले में कई स्थानों पर पीपीएम की मात्रा 600 तक दर्ज की गई। इस कारण भूमिगत जल खतरनाक है। लोहारू क्षेत्र के पानी के टीडीएस संतुलित नहीं है और अधिकतर तत्वों की मात्रा निर्धारित से कम है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। भिवानी शहर, तोशाम, सिवानी क्षेत्र के जमीन के पानी में तत्वों की मात्रा खतरनाक स्तर पर मिली है।
तीन एलटी कर रहे जांच : जांच के लिए मोबाइल लैब में तीन लोगों की टीम बनाई गई है जिसमें लैब टेक्निशियन सन्नी, राजीव और संजय शामिल है। जांच टीम ने बताया कि पीने योग्य पानी का पीपीएम 200 से 400 तक होना चाहिए मगर जमीनी पानी का पीपीएम 600 से भी ज्यादा सामने आ रहा है। टेस्ट किए गए पदार्थ की चार रिपोर्ट बनाई जाती है। जिनमें से स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़, जिला खाद्य पदार्थ विभाग, एक रिपोर्ट ग्राहक को और रिपोर्ट खुद मोबाइल लैब विभाग अपने पास रखते है। स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़ से यह रिपोर्ट खाद्य पदार्थ विभाग पंचकूला में भेजी जाएगी। जिसके माध्यम से सरकार उस पर कदम उठाएगी।
कैंसर, हड्डियां कमजोर होने, पीलिया, बाल झड़ने का खतरा
जमीन के पानी में टीडीएस, हार्डनेस, फ्लोराइड आदि की मात्रा का ज्यादा होना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। लोहारू क्षेत्र के गांवों में कैंसर के मरीज ज्यादा है और इसका कारण पानी का खराब होना ही माना जा रहा है। इसके अलावा हड्डियों का कमजोर होना, पीलिया, बालों का झड़ना, पेट के इंफेक्शन, पथरी का भी खतरा रहता है।
हर छह महीने जांच के लिए पहुंचेगी मोबाइल लैब : स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब एक जनवरी से भिवानी में सेंलों की जांच कर रही है। मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब हर छह महीने में 15 दिन के लिए जिले में जाएगी। खाद्य पदार्थों में जो भी खामियां मिलेंगी, उनकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग सरकार को सौंपेगा। जिसके आधार पर सरकार उसके बारे में कदम उठाएगी।
मोबाइल वैन सैंपलिंग कर रही है और इस जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया जाएगा। इसकी रिपोर्टिंग सीधे मुख्यालय में है। दो मोबाइल वैन पूरे हरियाणा में सैंपलिंग कर रही है।
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- डॉ. सुरेन्द्र पुनिया, फूड सेफ्टी ऑफिसर
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