भिवानी। अब अप्रमाणित वीडियो के सहारे ही राज्य योग ओलंपियाड कराए बिना अधिकारी राष्ट्रीय खिलाड़ी के चयन की तैयारी करने में जुट गए हैं। क्लस्टर से लेकर खंड स्तर और फिर जिला स्तर पर योग ओलंपियाड की प्रतिस्पर्धाएं हर वर्ग के खिलाड़ी की कराई गई थी, मगर अब राज्य स्तर पर योग ओलंपियाड में खिलाड़ियों के चयन के लिए प्रतियोगिता नहीं कराई जा रही। उसकी जगह मनमर्जी से बनवाए गए वीडियो से ही राष्ट्रीय योग ओलंपियाड के खिलाड़ी के चयन की तैयारी जा रही है। इससे खिलाड़ियों में रोष व्याप्त है और वे प्रतियोगिता को चयन का आधार बनाने की मांग कर रहे हैं।
जिलास्तर पर कराए गए योग ओलंपियाड में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान भिवानी की तरफ से न तो कैमरे लगाए गए थे और न ही कोई प्रमाणित वीडियो तैयार कराए गए थे। इसके बावजूद इधर-उधर से एकत्रित की गई खिलाड़ियों की अप्रमाणित वीडियो जिलास्तर से एससीईआरटी (राज्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) गुरुग्राम के पास भेजा गया है, जिनके बूते ही अब नेशनल खिलाड़ी चयनित किए जाने की आशंका बनी हुई है। इस पर खिलाड़ियों के अभिभावकों ने कड़ी आपत्ति जताकर अधिकारियों की मंशा और योग ओलंपियाड के आयोजन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भिवानी जिले में क्लस्टर के बाद खंडस्तरीय योग ओलंपियाड कराया गया था। जिसके बाद 21 अप्रैल को मॉडल संस्कृति राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी में जिलास्तरीय योग ओलंपियाड कराया गया। जिलास्तरीय योग ओलंपियाड के दौरान जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान भिवानी ने नियमों को भी ताक पर रख डाला। खिलाड़ी जिस समय अपना बेहतर प्रदर्शन दे रहे थे, उस समय विभाग की तरफ से कोई भी प्रमाणित वीडियो कैमरा नहीं लगाया गया था, जबकि कुछ खिलाड़ियों के चयन में अभिभावकों ने धांधली की आशंका भी जताई थी।
इसके बाद अब गुपचुप तरीके से चयनित खिलाड़ियों की मनमाने ढंग से बनाए गए कुछ वीडियो जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की तरफ से मांगे गए हैं और उनको राज्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गुरुग्राम के पास भेजा गया है। इसके आधार पर ही राष्ट्रीय खिलाड़ियों का चयन किए जाने की बातें सामने आई हैं।
योग ओलंपियाड में नियमों से भी खिलवाड़
जिलास्तरीय योग ओलंपियाड में कक्षा छह से आठवीं तक के अंडर 14 आयु वर्ग लड़के और लड़कियों की स्पर्धाएं कराई गई थीं। इसमें चार वरीयता के खिलाड़ियों का चयन जरूरी है। इसी तरह कक्षा नौवीं से दसवीं की श्रेणी में अंडर 17 आयु वर्ग के लड़के और लड़कियों की जिलास्तरीय योग ओलंपियाड में चार वरीयता के खिलाड़ियों का चुना जाना अनिवार्य है। इसके आधार पर राज्य स्तर पर हर श्रेणी से चार वरीयता के खिलाड़ी भेजे जाने हैं, लेकिन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पहले स्थान को ही वरीयता दे रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय खिलाड़ी के चयन में केवल एक खिलाड़ी का वीडियो से कैसे निर्णय हो पाएगा कि यही गंभीर सवाल है। वहीं, अन्य खिलाड़ियों को बिना प्रमाणित वीडियो के कैसे प्रतियोगिता से बाहर कर पाएंगे, इनका भी कोई नियम स्पष्ट नहीं है।
ओलंपियाड की आड़ में चल रही मिलीभगत
योग खिलाड़ी के अभिभावक संजय, सतीश कुमार, महावीर व सविता ने आरोप लगाया कि ओलंपियाड की आड़ में खिलाड़ियों के चयन में बड़े स्तर पर धांधली चल रही है। कुछ लोगों ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपने स्तर पर परिणाम तैयार कराया है। इसमें उनकी अकादमी से ही खिलाड़ियों को हर बार चुन लिया जाता है और वे राष्ट्रीय स्तर पर आगे जाते हैं। दिखावे के लिए क्लस्टर , खंड और जिलास्तरीय स्पर्धाएं कराई जाती हैं, लेकिन नेशनल स्पर्धाओं में केवल चुनिंदा अकादमी और चहेतों को ही भेजा जाता है। अगर पिछले खेलों और इस ओलंपियाड की जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर मिलीभगत सामने आ सकती है। बिना प्रमाणित वीडियो से राष्ट्रीय खिलाड़ी का चयन मानकों पर सही नहीं है, सरकार और शिक्षा विभाग को इस मनमानी पर रोकना चाहिए।
जिलास्तरीय योग ओलंपियाड में चार वरीयता वाले खिलाड़ियों का वीडियो हमने ऊपर भेज दिया है। विभाग की तरफ से कोई वीडियोग्राफी नहीं कराई गई थी, ये वीडियो खेल स्पर्धा के दौरान बनाया गया था। अब इन वीडियो के आधार पर ही राष्ट्रीय खिलाड़ी का चयन हर वर्ग में होना है। इस संबंध में उच्चाधिकारी ही निर्णय लेंगे।
-मोनिका कौशिक, इंचार्ज जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, भिवानी।
मेरे पास चरखी दादरी जिला शिक्षा अधिकारी सहित कई जगह का चार्ज हैं, इसलिए मुझे इसकी अभी ज्यादा जानकारी नहीं है। योग ओलंपियाड में किस तरह से चयन होगा, इस बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
-वीरेंद्र सिंह नारा, डिप्टी डायरेक्टर, राज्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गुरुग्राम।