राजकीय कन्या स्कूल का मुख्य द्वार। संवाद
भिवानी। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। सभी विद्यालयों में समितियों का गठन 19 से 23 मई तक किया जाएगा। नई चुनी जाने वाली समिति का कार्यकाल दो साल का होगा। समिति का मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हुआ है। शिक्षा निदेशालय ने समिति के गठन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक व खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
दरअसल, सभी सरकारी स्कूलों में सरकार द्वारा हर दो साल के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया जाता है। इसमें विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता, विद्यालय के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता साथ-साथ ग्राम पंचायत या नगर पालिका के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। इनके द्वारा स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी सभी कार्य किए जाते हैं।
विद्यालय प्रबंधन समिति में 300 विद्यार्थियों तक 12 सदस्य, 500 तक 16 सदस्य व 500 से अधिक विद्यार्थियों पर 20 सदस्य शामिल होते हैं। प्रत्येक विद्यालय में एसएमसी का गठन करना अनिवार्य होता है। यदि एक ही जगह पर प्राथमिक विद्यालय और माध्यमिक उच्चतर विद्यालय संचालित हो रहे हैं तो वहां भी उनकी कमेटी का अलग-अलग गठन किया जाएगा।
समिति गठन के दौरान विद्यालय में मौजूद सभी पदाधिकारियों के हस्ताक्षर करना एसएमसी रजिस्टर पर अनिवार्य है। निर्देशों में शिक्षा विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पद चुने गए व्यक्ति दोबारा इन पदों पर चयनित नहीं होंगे। एक ही समिति में एक परिवार के दो सदस्य शामिल नहीं होंगे। बैठक में चयन के लिए नामांकन किया जाता है। इसमें माता-पिता, शिक्षक और स्थानीय समुदाय के सदस्य भाग लेते हैं, जिसमें सर्वसम्मति से सदस्यों का चयन किया जाता है। संवाद
शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय प्रबंधन कमेटी के गठन के लिए पत्र भेजा गया है। कमेटी का गठन दो साल के लिए किया जाता है। पिछली कमेटी का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। सभी विद्यालयों को 23 मई तक विद्यालय प्रबंधन कमेटी का गठन करना अनिवार्य है। कमेटी का गठन विभाग के मापदंडों के अनुसार करना अनिवार्य है।
- शिवकुमार तंवर, उप जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी।