बिड़ौला माइनर में अधूरा पड़ा काम।
भिवानी। सिवानी क्षेत्र के रेतीले टीलों की टेल तक पानी पहुंचाने के लिए भले ही सरकार करोड़ों का बजट खर्च कर रही है, मगर वन मंडल और सिंचाई विभाग की आपसी खींचतान की वजह से सैकड़ों किसानों के खेत अब भी सूखे पड़े हैं। ताजा मामला बिड़ोला माइनर का है।
इसका आरडी शून्य से 21 हजार तक नवीनीकरण के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने साढ़े तीन करोड़ रुपयों की लागत से काम करीब डेढ़ साल पहले शुरू कराया था। मगर आज तक यह काम अधर में लटका हुआ है। वजह नहर के दायरे में काफी हरे पेड़ आ रहे हैं, जिनकी कटाई को लेकर सिंचाई और वन मंडल विभाग आपस में उलझा हुआ है। दोनों ही विभाग के अधिकारी मामले को लेकर आमने-सामने हैं। नौबत पुलिस तक भी आ चुकी है। अब माइनर के नवीनीकरण हो चुके हिस्से में भी लोगों ने मिट्टी डालकर अवैध रास्ते बनाए हुए हैं। इसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग सिवानी डिविजन के तहत बिडौला माइनर आरडी शून्य से 21 हजार तक करीब पौने छह किलोमीटर लंबी है। बिडौला माइनर के नवीनीकरण का कार्य पर 350 लाख रुपये का बजट भी खर्च किया जाना है। नहर के नवीनीकरण की आधारशिला भी सूबे के कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल और भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद चौ. धर्मबीर सिंह ने 16 मई 2022 को रखी थी। इसके बाद तय समय सीमा में काम पूरा कराने के लिए सिंचाई विभाग ने काम भी शुरू करा दिया था।
सिंचाई विभाग सिवानी डिविजन ने आरडी शून्य से लेकर करीब साढ़े चार किलोमीटर दायरे में नहर का नवीनीकरण का काम भी करा दिया। जबकि सवा किलोमीटर हिस्से में नहर के नवीनीकरण का मामला पिछले डेढ़ साल से अटका हुआ है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की माने तो नहर के इस हिस्से में कई सालों के दौरान पेड़ उग गए हैं। हरे पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग अनुमति नहीं दे रहा है। इसी को लेकर मामला काफी खींच चुका है। एक बार विभाग ने काम शुरू कराया तो वन विभाग ने जबरन काम बंद करा दिया और दखल देने के लिए पुलिस तक बुला केस दर्ज कराने की भी तैयारी कर डाली।
इसके बाद से ही नहर नवीनीकरण का काम ठंडे बस्ते में पड़ा है। अब नवीनीकरण हो चुकी नहर में भी अवैध रूप से लोगाें ने रेत डालकर खेतों तक वाहनों को ले जाने के लिए रास्ते बना रखे हैं। इसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। नहर के नवीनीकरण नहीं होने से बिडौला नहर से जुड़े सैकड़ों किसानों के खेतों तक भी सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जबकि ये सूखा और रेतीला इलाका नहरी पानी के लिए काफी सालों से तरस रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने साढ़े तीन करोड़ खर्च कर डाले, फिर भी उनके खेत सूखे पड़े हैं और बूंद-बूंद पानी को भी तरस रहे हैं।
पिछले डेढ़ साल से बिडौला माइनर के नवीनीकरण का काम बंद पड़ा है। विभाग ने साढ़े चार किलोमीटर दायरे में नहर के नवीनीकरण का काम पूरा करा दिया है। जबकि सवा किलोमीटर दायरे में करीब सवा सौ हरे पेड़ों की कटाई को लेकर वन विभाग से एनओसी नहीं मिल रही है। इसी वजह से काम बंद पड़ा है। वन विभाग से एनओसी मिलने के तुरंत बाद काम शुरू करा देंगे।
- परमवीर, एसडीओ, सिवानी डिविजन सिंचाई विभाग भिवानी।