भिवानी। आंधी-तूफान में गिरे संरक्षित प्रजातियों के पेड़ों की कटाई या हटाने से पहले वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वन विभाग ने खेतों और विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पेड़ गिरने के बाद आमजन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उप वन संरक्षक डॉ. राजेश वत्स ने बताया कि रोहिड़ा, जांटी, बेरी, सिरस, हिंदोक और शीशम समेत संरक्षित प्रजातियों के पेड़ों को काटने या हटाने के लिए वन मंडल कार्यालय भिवानी से पूर्व अनुमति लेनी होगी। इसके लिए संबंधित व्यक्ति विभाग में आवेदन कर सकता है। उन्होंने बताया कि सफेदा, पॉपलर, बकैन, बांस, तूत, अमरूद, देसी कीकर और मस्कट जैसी कुछ प्रजातियों की कटाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी गिरे हुए पेड़ को हटाने से पहले उसकी प्रजाति की सही पहचान अवश्य करें ताकि नियमों का उल्लंघन न हो। विभाग के अनुसार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
डॉ. राजेश वत्स ने कहा कि बिना अनुमति संरक्षित पेड़ों की कटाई करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने किसानों और भूमि मालिकों से सावधानी बरतने तथा विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।