भिवानी। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष 60 किलोग्राम मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज सचिन सिवाच का पैतृक गांव मिताथल पहुंचने पर ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान कोच टेकराम ने कहा कि मैच के दौरान जो गलतियां सामने आई हैं, उन्हें दोबारा न होने देने पर फोकस रहेगा।
उन्होंने कहा कि मुकाबले के समय कुछ कमियां देखने को मिली थीं जिन्हें दूर किया जाएगा। गांव की सीमा पर सैकड़ों ग्रामीणों, युवाओं, खेल प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और भारत माता के जयघोष के साथ सचिन का स्वागत किया।
इसके बाद गांव में विजय जुलूस निकाला गया जिसमें लोगों ने तिरंगा लहराकर अपने चैंपियन का उत्साह बढ़ाया।
ग्रामीणों ने कहा कि सचिन सिवाच ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन से मिताथल, भिवानी, हरियाणा और पूरे देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। युवाओं को उनसे प्रेरणा लेकर खेलों में आगे बढ़ना चाहिए।
सचिन सिवाच ने कहा कि यह स्वर्ण पदक पूरे देश, हरियाणा और गांववासियों को समर्पित है। उन्होंने सफलता का श्रेय परिवार, कोच और देशवासियों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए पदक जीतना है।
कोच टेकराम ने कहा कि सचिन ने वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण से यह उपलब्धि हासिल की है। उन्हें अपने शिष्य पर गर्व है और उम्मीद है कि सचिन आने वाले ओलंपिक व विश्व प्रतियोगिताओं में भी देश का नाम रोशन करेगा।
सचिन के करीबी अशोक सिवाच ने बताया कि कोच टेकराम ने शुरुआत में अपने पैर से खींची गई सर्कल की रिंग में सचिन को अभ्यास करवाया था। उन्होंने कहा कि गांव के स्टेडियम में सुविधाओं की कमी है। यदि गांव में बेहतर सुविधाएं और बॉक्सिंग रिंग उपलब्ध हो तो कई अन्य खिलाड़ी भी आगे बढ़ सकते हैं।