गांव कुंगड़ में मुंढाल तालु लिंक ड्रेन वीरवार रात को ओवरफ्लो होने के कारण 10 एकड़ जमीन में खड़ी फसल के अंदर दो फीट तक पानी भर गया है। पानी भरने के कारण कुंगड़ के एक किसान की एक एकड़ में निकाले गए धान पानी में तैर गए, जबकि एक किसान की चार एकड़ में हाल ही में बिजाई की गई गेहूं नुकसान में आया है।
मुंढाल तालु लिंक ड्रेन ओवरफ्लो होना का मुख्य कारण सुंदर ब्रांच नहर का माना जा रहा है। क्योंकि वीरवार से ही सुंदर ब्रांच नहर में पानी खतरे के निशान को पर कर गया था। मोहला हेड से सुंदर ब्रांच नहर में 900 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। गांव कुंगड़ तक नहर में पानी की क्षमता साढ़े चार सौ क्यूसेक ही रह जाती है। मगर इस समय नहरी पानी को सिंचाई में प्रयोग करना पूरी तरह से किसानों ने बंद कर रखा है। जिससे नहर में पानी का स्तर बढ़ने से खतरा बढ़ा है।
शाम ढलते-ढलते तो सुंदर ब्रांच नहर के हालात इस कदर बेकाबू हो गए थे कि गांव खेड़ी दौलतपुर में हेड पुल के पास बवानीखेड़ा की ओर नहर के पटड़े के ऊपर से पानी खेतों की ओर चल पड़ा था। ऐसे में किसानों की सूझबूझ व सिंचाई विभाग के प्रयास से नहर के पटड़े के ऊपर मिट्टी का बांध बना दिया गया और तुरंत सुंदर ब्रांच नहर का पानी मुंढ़ाल तालु लिंक ड्रेन में पूरा खोल दिया गया। इससे सुंदर ब्रांच नहर को तो बचा लिया गया। मगर गांव कुंगड़ में मुंढाल तालु लिंक ड्रेन का पानी ओवरफ्लो हो कर खेतों तक पहुंच गया, जिससे वहां कि किसानों को सीधा नुकसान उठाना पड़ा है।
किसानों ने लगाया विभाग पर आरोप : किसान कृष्ण व संदीप ने कहा कि उनके 10 एकड़ खेत में आए पानी का सीधा जिम्मेदार सिंचाई विभाग है। मुंढाल तालु लिंक ड्रेन ओवरफ्लो होने की जानकारी विभाग के अधिकारियों को बार-बार दी गई। मगर विभाग की ओर से किसी ने इस ड्रेन को संभालने तक का समय नहीं लगा। किसानों ने बताया कि पिछले चार साल से इस ड्रेन के ओवरफ्लो होने के कारण खरीफ व रबी की फसलें बर्बाद हो रही हैं। गांव कुंगड़ निवासी संदीप ने बताया कि गांव कुंगड़ में उनके खेतों से निकली ड्रेन पर विभाग ने सर्विस रोड तक नहीं छोड़ रखा है। विभाग व ठेकेदारों की इस गलती के कारण उनकी पिछले चार साल से फसलें बर्बाद हो रही है। इसी को लेकर उन्होंने कोर्ट केस किया था, जिस पर कोर्ट ने सिंचाई विभाग पर जुर्माना भी किया था।
ड्रेन में पानी जाने से पांच गांवों को होता है फायदा : सुंदर ब्रांच नहर से मुंढ़ाल तालु लिंक ड्रेन में छोड़े गए पानी से मुंढ़ाल सहित कुंगड़, सिवाना, अलखपुरा, मेहंदा व बड़सी के किसानों को सीधा फायदा पहुंचता है। क्योंकि जिस क्षेत्र से ड्रेन को निकाला गया है। वहां सिंचाई के संसाधन कम हैं। ऐसे में वहां फसलें बस ड्रेन के पानी पर ही आधारित रह गई हैं। ऐसे में अब ड्रेन के छोड़े गए पानी से किसान रबी बिजाई के लिए सिंचाई में प्रयोग कर रहे हैं। यानी ड्रेन की बदौलत हजारों किसानों के खेतों में फसल तैयार होती है।
वीरवार को सुंदर ब्रांच नहर में पानी क्षमता से अधिक था, जिससे नहर टूटने का पूरा खतरा बना हुआ था। ऐसे में मुंढाल तालु लिंक ड्रेन में पूरा पानी खुलवाने के कारण ही सुंदर ब्रांच नहर को गांव खेड़ी में टूटने से बचाया गया है। मानते हैं कि ड्रेन के ओवरफ्लो होने के कारण कुछ किसानों के खेतों में पानी चढ़ा है। मगर नहर को बचाना जरूरी था।
- जोगेंद्र सिंह, एसडीओए सिंचाई विभाग