दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709ई कुसुंभी मोड़ के समीप करीब डेढ़ सौ साल पुराना बरसाती कुंड का पहले
भिवानी। तहसील अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर करीब 150 साल पुराने ऐतिहासिक बरसाती कुंड की मुख्तयारनामा से रजिस्ट्री कराए जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। इतना ही नहीं माफिया ने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान का प्राचीन निर्माण तोड़ कर धरोहर का अस्तित्व मिटा भी दिया। अब करीब 20 करोड़ रुपये कीमत की इस भूमि पर प्लाॅट काटने की तैयारी हो रही है। वहीं, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने शासन के मुख्य सचिव से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709 ई पर कुसुंभी मोड़ के पास अंग्रेजी हुकूमत के दौरान करीब 150 साल पहले बरसाती कुंड का निर्माण कराया गया था। मुसाफिरों और व्यापारियों के लिए ये बरसाती कुंड और विश्राम के लिए कमरों का निर्माण भी कराया गया था,. जिस पर अंग्रेजी में उस प्राचीन धरोहर के इतिहास की गवाही देने के पत्थर भी लगाए गए थे। अब इन पत्थरों और ऐतिहासिक कुंड का अस्तित्व ही मिट चुका है। इसकी जगह बस चहारदीवारी और ऐतिहासिक कुंड के कुछ निशान बचे हैं, जो यहां अपने वजूद को मिटाने वालों की काली करतूतों की हकीकत को बयां कर रही हैं।
11 मई 2022 में नियमों को ताक पर रखकर कराई गई बरसाती कुंड की रजिस्ट्री
कुसुंभी मोड़ स्थित करीब सवा एकड़ भूमि पर बने ऐतिहासिक बरसाती कुंड का पहले विरासत का इंतकाल हुआ। इसके बाद इसकी रजिस्ट्री मुख्तयारनामा से कराई गई। पानीपत के साहपुर और ढाणी ब्राह्मण निवासी दो लोगों ने करीब सवा एकड़ की भूमि को खरीदा है। रोहतक के बैंक कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने मुख्तयारनामा के जरिये इस भूमि की बिक्री की है। 11 अप्रैल 2022 को विरासत का इंतकाल तहसील कार्यालय में दर्ज है। इससे पहले 2021 में इस भूमि का मुख्तयारनामा तैयार कराया गया था। जबकि 11 मई 2022 को कुंड की भूमि 39 लाख 75 हजार रुपये में बेच दी गई। इसकी रजिस्ट्री के दौरान दो लाख 78 हजार 250 रुपये का स्टॉप भी प्रयोग किया गया है। फिलहाल यहां अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बने प्राचीन कमरे और कुंड को तोड़ दिया गया है। वहीं. कुंड के बाहरी हिस्से की चहारदीवारी कर यहां कॉमर्शियल प्लॉट काटने की तैयारी चल रही है।
प्राचीन धरोहर की भूमि का स्वरूप बदलना कानूनी अपराध : बृजपाल सिंह परमार
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि प्राचीन धरोहर व सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्वरूप बदलना व उसकी बिक्री करना कानूनी अपराध है। इस संबंध में संगठन ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को शिकायत देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में विरासत के इंतकाल में मालिकों की तरफ से मुख्तयारनामा के जरिये इस भूमि की बिक्री की गई है। राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में ये भूमि कुंड के नाम से दर्ज है। रिकॉर्ड के अनुसार इस भूमि के स्वरूप को नहीं बदला जा सकता है। इस भूमि की रजिस्ट्री मेरे से पहले के अधिकारियों द्वारा की गई है।
- सुरेश कुमार, तहसीलदार, भिवानी।