भिवानी। साहब! हम तो मंडी में प्राइवेट तौर पर अपनी सरसों बिक्री करने आए हैं, मगर फिर भी हमें सुबह से लाइन में खड़ा रहना पड़ा। सरकारी को सरसों बेचते तो बात और थी। अब खुद मर्जी से फसल बेच रहे हैं, फिर भी हमें यहां बेवजह परेशान होना पड़ा है। यह दर्द मंडी में सरकारी खरीद शुरू होने के पहले दिन मंडी पहुंचे किसानों ने बयां किया। अमर उजाला की टीम ने जिला मुख्यालय की मंडी का हाल जाना तो सरकारी कट्टों में प्राइवेट सरसों नजर आई।
दरअसल इन कट्टों में भरी हुई सरसों प्राइवेट एजेंसियों ने खरीद की थी, जबकि कट्टों के बाहर सरकारी एजेंसी का लेवल लगा हुआ था। यह भ्रम किसानों में भी बना। पहले दिन मंडी में सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारी नहीं पहुंचे। जबकि पहले दिन करीब 400 किसान मुख्यालय की मंडी में सरसों लेकर पहुंचे। पहले दिन करीब सात हजार क्विंटल से अधिक सरसों की आवक हुई।
वीरवार से मंडियों में सरसों व गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई। अभी तक मंडी में किसान अपनी मर्जी से सरसों लेकर पहुंचे, उनके पास विभाग से कोई मैसेज नहीं आया था। मंडी में आना उनकी मजबूरी भी थी, क्योंकि भले ही किसान फसल प्राइवेट बेचे, उसके लिए भी उसे मंडी में एक फीसदी मार्केट फीस और आढ़ती के जरिए ही देनी होगी। सीधे तेल मिलों पर सरसों बिक्री पर पाबंदी है। मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो सरसों की आवक करीब 15 दिन पहले से ही शुरू हो चुकी है। बुधवार को भी मंडी में 316 किसानों के गेट पास कटे थे। जिसमें करीब 5700 क्विंटल सरसों की आवक हुई थी। सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद पहले दिन सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारी मंडी से नदारद रहे। किसी भी किसान की सरसों सरकारी तौर पर खरीद नहीं हुई।
ये बोले किसान
सुबह से टोकन के लिए लाइन में खड़ा हूं, यहां न पीने को पानी व धूप से बचाव का कोई प्रबंध है। मैं दो एकड़ में बोई करीब 14 क्विंटल सरसों लेकर मंडी आया हूं, साहूकार को सरसों बेच रहा हूं, मगर फिर भी मुझसे यहां लाइन में लगकर टोकन लेने की औपचारिकताएं कराई जा रही हैं, मुझे बेवजह परेशान किया जा रहा है।
- रणबीर सिंह, कायला, किसान।
मैं सुबह ही ट्रैक्टर ट्रॉली में 15 क्विंटल सरसों लेकर मंडी पहुंच गया था। पहले तो ट्रैक्टर की लाइन में लगा और फिर टोकन की लाइन में लगना पड़ा। मैं अपनी सरसों प्राइवेट बेच रहा हूं, बावजूद इसके मुझसे कई तरह की औपचारिकताएं पूरी कराई जा रही हैं, इसमें मेरा काफी समय बर्बाद हुआ है। मार्केट में मुझे पांच हजार प्रति क्विंटल सरसों के दाम मिल रहे हैं।
- जगदीश टिटानी, किसान।
गर्मी में बेहाल हो गया हूं, सुबह से ट्रैक्टर में फसल लेकर खड़ा टोकन का इंतजार कर रहा हूं। अभी तक सरकारी खरीद का कोई मैसेज मेरे पास नहीं आया हैं। मैं तो अपनी फसल साहूकार को बेचकर जाऊंगा, क्योंकि मैं सरकारी खरीद का इंतजार नहीं कर सकता, न ही मुझे सरकार वाजिब दाम देगी।
-सतबीर सिंह कितलाना, किसान।
मंडी में 15 क्विंटल सरसों लेकर आया हूं। टोकन मिलने के बाद फसल की खुली बोली कराउंगा फिर इसे प्राइवेट बेचकर घर लौट जाऊंगा। मगर फिर भी मंडी आने के बाद टोकन और फसल की एंट्री कराने का झंझट बना हुआ है, इस बीच मैं काफी परेशान हुआ हूं।
- राजेंद्र मिताथल, किसान।
वर्जन:::
मंडी में सरसों की आवक लगातार हो रही है। पहले मंडी में मैनुअल तरीके से गेट पास दिए जा रहे थे, क्योंकि अब सरकारी खरीद शुरू हुई है तो वीरवार से ऑनलाइन गेट पास जारी किए गए हैं। मंडी आने वाले किसानों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अभी तक सरकारी एजेंसी से कोई नहीं आया है।
- प्रदीप, सहायक सचिव, मार्केटिंग बोर्ड भिवानी।