भिवानी। देखते ही देखते घरेलू कलह ने ऐसा विनाशकारी स्वरूप धारण कर लिया कि धनाना का एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह तबाह हो गया जब एक पिता ने अपने ही हाथों से संतानों का गला घोंट दिया। बड़ी बात यह कि दो बच्चों की हत्या के बावजूद हत्यारे के चेहरे पर पाश्चाताप के कोई भाव नहीं थे।
बेटा बसंत और बेटी आरुषि की हत्या के बाद आत्महत्या का प्रयास करने वाले सुभाष ने यहां तक कहा कि मरना ही उसका सौभाग्य होगा। जिंदा रहा तो उससे गंदा इस धरती पर कोई आदमी नहीं है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह अपनी जिंदगी आराम से जी रहा था, परंतु उसकी मां मेवा व पत्नी सरोज का छोटी-छोटी बातों पर रोज-रोज के झगड़े ने मेरा परिवार उजाड़ दिया। मां के झगड़े के कारण पिछले महीने 8 मई को मेरी पत्नी हमलोगों को छोड़कर चली गई।
सुभाष का कहना है कि वह पत्नी की मौत के बाद से हताश व परेशान था। जिंदगी बोझ बन गया था, जिसके चलते उसने रविवार को अपने दोनों बच्चों को मार दिया। उसके बाद खुद ने दो जहर की गोली खाई। वो खुद भी मरने के लिए फांसी लगाने वाला था लेकिन इससे पहले वह अपने हिसाब किताब की वीडियो बना रहा था। तभी उसका भतीजा घर आ गया।
आरोपी सुभाष ने कहा कि वह जीना नहीं चाहता। उसके परिवार की बर्बादी की वजह उसकी अपनी मां है। उसने ही हम सबको मरने के लिए मजबूर किया है।
पढ़ाई में अव्वल थे बसंत और आरुषि
पिता के हाथों मारे गए दोनों बच्चे बसंत व आरुषि पढ़ाई में अव्वल थे। बसंत ने दसवीं कक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 85 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। वहीं आरुषि ने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल कर परीक्षा पास की थी। दोनों पढ़लिखकर कामयाब इंसान बनना चाहते थे।