दिनोद आश्रम में लोगों को प्रवचन देते संत कंवर महाराज।
भिवानी। राधा स्वामी सत्संग दिनोद में 1997 में कंवर महाराज ने संत ताराचंद महाराज के नर चोला त्यागने पर संगत की सेवा के लिए गुरु गद्दी संभाली थी। गुरु गद्दी संभालने के पश्चात कंवर महाराज ने अपने गुरु के सतमार्गी कार्य को आगे बढ़ा दिया। एमए बीएड तक की शिक्षा प्राप्त कंवर महाराज को प्राथमिक शिक्षा गांव दिनोद में ही मिली गद्दी संभालने के बाद कुल 40 शाखाओं का निर्माण करवाया। महाराज अध्यात्म के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति भी सजग है। प्रतिदिन दिनोद गांव में स्थित राधा स्वामी आश्रम में लोगों को सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक खुराक परोसने के साथ-साथ कंवर महाराज आश्रम परिसर में पेड़ पौधों की देखभाल में भी अपना समय दे रहे हैं।
कंवर महाराज ने उपस्थित संगत को सत्संग फरमाते हुए कहा कि भक्त का हर पल भक्ति में जाता है। उन्होंने अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा कि जो जीवन गुरु की शरणाई में बीता सही मायने में जीवन तो वही है। उन्होंने कहा कि इंसान को गुरु वचन में रहना चाहिए। कलियुग में भक्ति के अनेक साधन हैं। लेकिन सत्संग ही एकमात्र जीव कल्याण का साधन है। उन्होंने फरमाया कि माध्यम कोई भी हो अगर उस से जीवन सुधार की प्रेरणा मिलती है तो उस माध्यम को बार बार अपनाना चाहिए। कथा भजन कीर्तन मन को कुछ समय के लिए शांति देते हैं क्योंकि इनका रस अल्प काल के लिए ही आनंद देता है। लेकिन सत्संग आपके जीवन को स्थिर दिशा दिखाता है। सत्संग इन सबसे ही बड़ा है क्योंकि सत्संग मन वचन और कर्म तीनों में सुधार लाता है। ये तीन ही जीवन का आधार है। इन तीन के बिगड़ने से ही जगत भी बिगड़ता है और अगत भी बिगड़ता है।
उन्होंने कहा कि जिसका मन चंगा है उसके मुख से वचन भी हमेशा सुखदाई ही निकलेगा। मीठी वाणी आपको अच्छा बनाती है और दूसरों को भी शांति देती है। वाणी की साधना कर्मों को भी अच्छा करती है। कर्म ऐसे करो कि जिससे खुद का भी जीवन सुधरे और जो औरों को भी प्रेरणा दे। संवाद