शहर की 70 फीसदी के करीब स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। रात को पूरा शहर अंधेरे के आगोश में खोया रहता है। ओवरब्रिज पर तो कुछ भी नजर ही नहीं आता। हर समय हादसे का अंदेशा है। नप अधिकारियों की दलील है कि उन्होंने तो बिजली का ठेका दे रखा है। मगर समस्या बनी है पुराने और नए ठेकेदार का विवाद। दरअसल नया ठेकेदार चाहता है कि उसे एक बार लाइटें ठीक करके दी जाए ताकि वह मेंटेनेंस सुचारु रख सके। वहीं पिछला ठेकेदार कहता है कि उसका ठेका खत्म हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है। वह उस समय हैंडओवर कर रहा था तब लिया नहीं। अब लाइटें खराब हो गईं।
शहर में करीब 67 सौ लाइटों है। जिनमें 70 फीसदी खराब है। 30 फीसदी तो ऐसी है जहां ट्यूब ही नहीं खाली फ्रेम है, वह भी टूटी हालत मेें। ठेकेदारों का विवाद आमजन के लिए परेशानी बना है। शहर के सभी मुख्य मार्गों पर रात के समय पूरा अंधेरा रहता है। कमाल की बात यह है कि करीब डेढ़ साल पहले रात को, अल सुबह स्पेशल जांच अभियान चलाकर डीसी व अन्य अधिकारी, नगर परिषद अधिकारी जांच कर रहे थे कि स्ट्रीट लाइटें जल रही है या नहीं, सफाई हुई या नहीं। जिस कारण कुछ सुधार भी हुआ। स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस का ठेका लेने वाले ठेकेदार पर कई बार जुर्माना भी लगाया गया। अब कोई अधिकारी न तो शहर की सफाई व्यवस्था देखने निकलता है और न ही स्ट्रीट लाइट व्यवस्था। यहीं कारण है कि दोनों व्यवस्थाएं बदहाल है।
दोनों ठेकेदारों की जिम्मेवारी तय कर रहे अधिकारी
ठेकेदारों के विवाद और आमजन की समस्या को देखते हुए अब नप अधिकारियों ने मध्यस्थता करते हुए दोनों की जिम्मेवारी तय की है। दोनों मिलकर स्ट्रीट लाइटों को ठीक करेंगे।