23 सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल भले ही खत्म हो गई हो मगर शहरवासियों के लिए बिजली संकट अब भी परेशानी बना है। रात को पांच घंटे तक शहर में ब्लैक आउट रहा। अनेक कॉलोनियों में तो सुबह तक लोग बिजली आने का इंतजार करते रहे। बिजली कटों का सीधा असर पेयजल सप्लाई पर पड़ा और शहर की अनेक कॉलोनियों में सुबह की पेयजल सप्लाई बाधित रही।
बिजली कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल बृहस्पतिवार रात 10 बजे खत्म हो गई और बिजली कर्मचारी ड्यूटी पर लौट आए। बिजली कर्मचारी भले ही लौट आए मगर बिजली संकट कम नहीं हुआ। रात 10 बजे ही बिजली कट लगा और 11 बजे के बाद ही बिजली बहाल हुई। रात 12 बजे फिर बत्ती गुल हुई और एक बजे के बाद आई। सुबह चार बजे बरसात और आंधी के चलते कट लगा और सुबह छह बजे तक बिजली बहाल हो पाई। यह तो शहर की अधिकतर कॉलोनियों का हाल था। अनेक कॉलोनियां ऐसी भी रही जहां 10 बजे गुल हुई बिजली सुबह आठ बजे तक भी बहाल नहीं हो पाई थी। इनमें एमसी कॉलोनी, महाराणा प्रताप कॉलोनी, शांति नगर, कोंट रोड का क्षेत्र शामिल रहा।
ओवरलोड बनी समस्या
सांगवान गांव के पावर हाउस में पिछले दिनों अंधड़ से चार-पांच बिजली के बड़े टावर गिर गए। अब बापोड़ा पावर हाउस से ही सप्लाई की जा रही है। इस कारण अब बिजलीघर ओवरलोड चल रहे है। ऐसे में कभी बीटीएम 132केवीए की बिजली काटनी पड़ रही है तो कभी हालुवास बिजलीघर की। फीडरों को बार-बार थोड़े-थोड़ अंतराल पर बंद कर ठंड़ा करना पड़ रहा है। बिजली के बार-बार के कटों के फ्यूज उड़ रहे है, जंपर उड़ रहे है और तारे टूट रही है।