भिवानी। सरकारी और निजी स्कूलों में एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। इस दौरान निजी स्कूलों की ओर से दुकानों पर कमीशनखोरी कर किताबें व वर्दियों की बिक्री करवाई जा रही है। जिसमें विद्यार्थी के अभिभावकों को व्हाट्सअप पर मैसेज और विजिटिंग कार्ड दिए जा रहे है, जिसमें संबंधित दुकान का पता दिया जा रहा है। इस मामले को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसको लेकर अब माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने डीईओ और डीईईओ को ऐसे निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में पत्र जारी किया है। हालांकि एक सप्ताह में अधिकतर विद्यार्थी किताब और स्कूल ड्रेस महंगे दामों पर खरीद चुके हैं। इसके कारण अभिभावकों की जेब पर हजारों रुपये का खर्च बढ़ा है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को आदेश पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र के मान्यता पत्र विद्यालयों को निर्देश दे कि कोई भी निजी विद्यालय हरियाणा विद्यालय शिक्षा(संशोधन) नियम 2021 के पैरा 3(6) के अनुसार अपने विद्यालय के विद्यार्थियों को अनुशंसित दुकान से पुस्तकें, कार्य-पुस्तिकाएं, लेखन सामग्री, जूते, मौजे, वर्दी इत्यादि खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। यदि किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय इस नियम का उल्लंघन कतरा है तो उसके विरुद्ध हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियमावली 2003 के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
वहीं स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि संगठन की तरफ से कमिशनखोरी के चक्कर में अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबों और स्कूल ड्रेस का बोझ लादने वाले प्राइवेट स्कूलों की शिक्षा निदेशालय को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।