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नकली फूड सप्लीमेंट बनाने की फैक्ट्री पकड़ी

Sun, 03 Jul 2016 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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नकली सप्लीमेंट फैक्ट्री - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अच्छी मसल्स के लिए फूड सप्लीमेंट का सेवन करने वालों के लिए यह खबर झटका देने वाली है। शहर के न्यू उत्तम नगर में बंद मकान में मिलावटी फूड सप्लीमेंट तैयार करने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बड़ी मात्रा में फूड सप्लीमेंट के डिब्बे व सामग्री बरामद की है। फैक्ट्री में निग्न क्वालिटी के मक्का आटा (मेजी स्टार्च पाउडर) में डेक्सामिथासोन और साइप्रोहेप्टाडीन गोलियां मिलाकर नकली फूड सप्लीमेंट बनाया जाता था। स्वाद के लिए इसमें चाकलेट पाउडर और ग्लूकोज मिलाया जा रहा था। पुलिस ने दो युवकों को मौके से काबू किया है।
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शनिवार दोपहर न्यू उत्तम नगर में दो युवकों को नकली फूड सप्लीमेंट बनाते पकड़ा गया। फैक्ट्री संचालक मुख्य आरोपी मौके से भागने में कामयाब रहा। फूड सप्लीमेंट बनाने का सामान, तैयार माल व कच्चा माल का स्टॉक चौंकाने वाला था। भारी मात्रा में मक्का आटा के कट्टे, दवाइयां, चॉकलेट पाउडर के साथ पिसाई चक्की, सील करने की मशीन, भार करने की मशीन बरामद की। पकड़े गए युवकों की पहचान चरखी दादरी के समेश्वर जोहड़ के पास रहने वाले नरेंद्र व हरिनगर चरखी दादरी वासी मनीष के रूप में हुई। फरार मुख्य आरोपी नरेंद्र का ही भाई नवीन है। सीआईडी टीम ने फैक्ट्री पकड़ने के बाद इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी। सायं को पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व पुलिस टीम सारा सामान लेकर थाना पहुंची। समाचार लिखे जाने तक मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही थी। छापा मारने वाली टीम में सीआईडी इंस्पेक्टर आजाद सिंह, एएसआई सुनील व एएसआई राजकरण शामिल रहे। सीआईडी इंस्पेक्टर आजाद सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कीर गई थी और दो आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। मामले में टीआईटी चौकी से हरिवल्लभ सिंह ने बताया कि नकली फूड सप्लीमेंट बनाने की फैक्ट्री सीआईडी टीम ने पकड़ी है। इसमें कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही फरार आरोपी को भी पकड़ लिया जाएगा।

30 हजार गोलियां मिली, 250 रुपये में तैयार कर पांच हजार में होती थी बिक्री
नकली फूड सप्लीमेंट का एक डिब्बा तैयार करने में बमुश्किल 250 रुपये का खर्च आता था। इसे पांच से हजार रुपये में विभिन्न जिम संचालकों और दवा विक्रेताओं को बेचा जाता था। जो आगे इसके और दाम बढ़ाकर बेचते थे। मौके से डेक्सामिथासोन गोलियों के सौ पाउच मिले हैं। एक पाउच में दो सौ गोलियां है। यानी डेक्सामिथासोन की 20 हजार गोलियां मिली हैं। एक पाउच की कीमत है महज 44 रुपये। इसी तरह साइप्रोहेप्टाडिन के सौ पाउच मिले हैं। एक पाउच में सौ गोलियां है। दस हजार गोली मौके से बरामद हुई हैं। एक पाउच की कीमत 15 रुपये है और इसमें एक सौ गोलियां है। यानी गोलियों के इन एक-एक पाउच से मक्का आटा से कई किलो नकली फूड सप्लीमेंट तैयार किया जा रहा था।
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14 नामी कंपनियों के लेबल प्रयोग कर होती थी बिक्री
नकली फूड सप्लीमेंट बनाने वाली फैक्ट्री से ब्रांडेड कंपनियों के रेफर, पैकेट मिले है। जिनमें जीएमपी सर्टिफाईड, कनाडा नटारियो के न्यूट्रिशन, लबराडा कंम्पनी का मास गेनर, एसएसआर फॉर्मा का व्हे प्रोर्टीन, फिकवा कम्पनी का मास गेनर, मोम कम्पनी का बिग मैक्स नाम का सप्लीमेंट, रिडएक्स लैब का व्हे काम्लेक्स, जपकटर कंपनी का मस मास शामिल है। इन नामों से इस नकली फूड सप्लीमेंट को बेचा जा रहा था। इन फूड सप्लीमेंट को विभिन्न जिम, दवा दुकानों के माध्यम से कई गुणा ज्यादा दामों पर बेचा जाता था।

17 कट्टे मक्का आटा, भारीमात्रा में मिली साइप्रोहेप्टाडिन व डेक्सामिथासोन दवा
नकली फूड सप्लीमेंट बनाने वाली 14 नामी कंपनियों के प्रोटीन पाऊडर, प्रोटीन व्हे, साईप्रोहैप्टाडिन, डिक्सामिथासोन व निम्न  क्वालिटी का मक्का आटा बरामद किया गया। 25-25 किलो के 17 कट्टे मक्का आटा के मिले है। इनके अलावा चाकलेट पाउडर और ग्लूकोज पाउडर मिला है। इनके अलावा डेक्सामिथासोन और साइप्रोहेप्टाडिन गोलियों के पाउच मिले है। दो, पांच व 10 किलो के नकली फूड सप्लीमेंट के तैयार व खाली करीब 150 डिब्बे मिले है। फैक्ट्री से मिक्स करने की चक्की, भार करने वाली मशीन, पैकिंग करने वाली मशीन के अलावा भारी मात्रा में विभिन्न कंपनियों के रेपर और पॉलीथिन बरामद की। डिप्टी सिविल सर्जन कृष्ण कुमार का कहना है कि नकली फूड सप्लीमेंट से हड्डियां खोखली हो जाती हैं।

ढाई घंटे इंतजार, फिर भी नहीं आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी
छापा दोपहर दो बजे मारा गया और नकली फूड सप्लीमेंट फैक्ट्री पकडने के बाद इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दीगई। सायं करीब पौने पांच बजे तक भीस्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई चिकित्सक या अन्य स्टाफ सदस्य मौके पर नहीं पहुंचा था।
 
तीन सौ रुपये मजदूरी में करते थे काम
पकड़े गए आरोपियों नरेंद्र और मनीष ने बताया कि वे तो यहां काम करते थे। काम करने के बदले तीन सौ रुपये प्रतिदिन के दिए जाते थे। उन्हें नहीं पता कि कहां सामान बेचा जाता था।
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