भिवानी। हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शनिवार को राजकीय चिकित्सकों की दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल रही। चिकित्सकों ने सुबह नौ से 11 तक ओपीडी में पेन डाउन हड़ताल रखी और नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग गेट के बाहर एकत्रित होकर मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
चिकित्सकों के इंतजार में मरीज इधर-उधर भटकते रहे। मरीजों को इस दौरान उपचार और दवा नहीं मिली। वहीं कई मरीजों की हालत बिगड़ी तो उन्हें आपात विभाग में ले जाया गया। वहीं राजकीय चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से प्राइवेट अस्पतालों में सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक ओपीडी रही। वहीं नागरिक अस्पताल में दोपहर 11 बजे से पहले किसी भी मरीज को चिकित्सीय सेवाएं नहीं पाईं।
हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने आपातकालीन विभाग के बाहर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। वहीं चिकित्सकों ने अल्टीमेटम दिया कि जल्द उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वे केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर कड़ा फैसला लेने पर मजबूर होंगे।
डॉ. मनीष श्योराण, डॉ. यतीन गुप्ता ने कहा कि राजकीय चिकित्सकों कि मुख्य चार मांगे हैं। इसको लेकर आंदोलन करना पड़ा है। इसमें पहली मांग चिकित्सकों का स्पेशल कैडर लागू कर उसी हिसाब से उनका वेतनमान बढ़ाया जाए। दूसरा केंद्र के एसीपी की तर्ज पर राज्य में भी राजकीय चिकित्सकों को इसका लाभ दिया जाए। इसी तरह पीजी करने वालों के सरकार द्वारा एक करोड़ का सिक्योरिटी बॉड की शर्त हटाई जाए और इसे जरूरी होने पर 50 हजार तक किया जाए। इसके अलावा चिकित्सकों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जाए।
राजकीय चिकित्सकों ने कहा कि वे सरकार से केवल अपनी जायज मांगे पूरी कराना चाहते हैं, उनका मकसद जनता को परेशान करना नहीं है। चिकित्सक का काम हर मरीज को समय पर उपचार देना है, जिसे वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाते आ रहे हैं। महिला चिकित्सकों ने भी हड़ताल में ताल ठोकी।
बाल रोग विशेष डॉ. रीटा सिसोदिया ने भी मांगों को जल्द पूरा किए जाने की मांग की। ओपीडी का बहिष्कार कर सभी चिकित्सक आपात विभाग के गेट पर एकत्रित हुए। जहां रोष प्रदर्शन किया। इसी तरह ओपीडी में सुबह आठ बजे से ही मरीज पहुंचना शुरू हो गए थे। जबकि साढ़े आठ बजे ओपीडी में ओपीडी स्लिप काटनी शुरू हो गई थी। ओपीडी में चिकित्सकों के कक्ष के बाहर भी मरीजों की काफी भीड़ जुटी, जिनका चेकअप करने के लिए अंदर कोई चिकित्सक नहीं था। चिकित्सकों की कुर्सी खाली देखकर कई मरीज तो बिना उपचार ही वापस लौट गए।
-
दो घंटे उपचार मिला न दवाई, वापस लौटे मरीज
ओपीडी के बाहर काफी भीड़ जुटी देखकर कई मरीजों का दिल तो वैसे ही घबरा गया और कई मरीज फर्श पर ही बैठकर चिकित्सक के आने का इंतजार करते दिखे। मरीजों को शनिवार को 11 बजे तक उपचार मिला न दवाई। ऐसे में कई मरीजों की हालत बिगड़ी तो उन्हें आपातकालीन विभाग ले जाया गया, मगर विभाग में भी उन्हें राहत नहीं मिली, क्योंकि बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के परामर्श के वहां उन्हें कोई उपचार नहीं मिला। शनिवार को भी सामान्य दिनों की तरह ओपीडी में करीब साढ़े 1200 मरीज जुटे।
-
छोटे बच्चों को भी हुई परेशानी
काफी महिलाएं अपने छोटे बच्चों का चेकअप कराने के लिए ओपीडी में पहुंची थी, मगर चिकित्सक नहीं होने पर बच्चे बिलखते दिखे और महिलाएं भी काफी परेशान हुई। बच्चों की रोजाना ही करीब डेढ़ सौ से 200 तक ओपीडी पहुंच रही है। ऐसे में चिकित्सकों का इंतजार छोटे बच्चों के लिए काफी दिक्कतों भरा रहा।
-
हड़ताल के दौरान नहीं था कोई विकल्प
राजकीय चिकित्सकों की हड़ताल के दौरान ओपीडी में कोई दूसरा विकल्प भी नहीं किया गया था, क्योंकि पहले से ही स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की भारी कमी झेल रहा है। शनिवार को हड़ताल के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर देखा गया।