भिवानी। नागरिक अस्पताल लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है, जिसके कारण ड्यूटी स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ आ रहा है। अस्पताल में एक चिकित्सक के कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी है, जिसके कारण आपातकालीन विभाग में आए मरीज बिना उपचार के लाचार नजर आ रहे हैं। मंगलवार को आपातकालीन विभाग में सुबह की शिफ्ट में जिस चिकित्सक की ड्यूटी थी, उस पर पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी सौंप दी।
इसके कारण आपातकालीन विभाग में आए मरीजों को जांच करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। यह पहली बार नहीं हुआ, बल्कि अस्पताल में यह अक्सर देखने में मिल रहा है। अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के फिलहाल 21 पद खाली हैं। नागरिक अस्पताल में कार्यरत एक महिला फिजिशियन और टीबी विशेषज्ञ दो-दो माह की छुट्टियों पर चली गई है। ऐसे में फिजिशियन डॉ. धर्मेंद्र को टीबी वार्ड की जिम्मेदारी दी है, जबकि सीनियर फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता रोजाना 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी, वार्ड में दाखिल 30 से अधिक मरीज देख रहे हैं। इसके अलावा कार्यालय के कामों व ई संजीवनी की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई है। इसके अलावा सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ के भी एक-एक ही चिकित्सक है। वहीं ईएनटी, त्वचा रोग विशेषज्ञ और न्यूरो सर्जन के पद खाली पड़े हैं जिनसे संबंधित मरीजों को उपचार के लिए पीजीआई रोहतक या फिर निजी अस्पताल में भटकना पड़ रहा है।
ये बोले मरीज
आपातकालीन विभाग में आए मरीज सुरेश, आशीष, राजेश और सुनील ने बताया कि वे पिछले एक घंटे से चिकित्सक के इंतजार में बैठे हैं लेकिन चिकित्सक की पोस्टमार्टम में ड्यूटी आ गई है। आपातकालीन विभाग में प्रशिक्षु चिकित्सक थे जोकि एक मरीज की मरहम पट्टी में लगे हैं। ऐसे में चिकित्सक न होने की वजह से पिछले एक घंटे से कुर्सियों पर बैठे हैं और उन्हें उपचार नहीं मिल रहा।
पर्ची बनवाने से लेकर जांच तक लग रहे घंटों
अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण कार्य धीमी गति से हो रहा है। मरीज को चेकअप के लिए पर्ची बनवाने, चिकित्सक से जांच, टेस्ट और परामर्श के बाद दवा लेनी पड़ती है, जिसके लिए उन्हें चार से पांच घंटे का समय लग रहा है। लैब की रिपोर्ट तो दोपहर बाद आती है, जिस समय ओपीडी बंद हो जाती है। ऐसे में मरीजों को दूसरे दिन दवाइयों के लिए आना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
पद
स्वीकृत
कार्यरत
खाली
एसएमओ
08
02
06
डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट 02
00
02
एमओ
66
45
21
मैट्रन 01
00
01
सहायक मैट्रन
02
00
02
स्टाफ नर्स 143
126 17
एलटी
47
20
27
सहायक
27
14
13
क्लर्क
10
06
04
दो रेडियोग्राफर के सहारे 200 से अधिक मरीज
अस्पताल में मरीजों के टेस्ट करने के लिए महज एक एक्स-रे मशीन है, जिस पर नियमानुसार 50 से 60 एक्स-रे करने होते हैं। मगर मरीज अधिक होने के कारण इस मशीन पर रोजाना 200 से अधिक एक्स-रे हो रहे हैं। साथ ही एक्स-रे करने के लिए आठ रेडियोग्राफर की पोस्ट हैं जिन पर सिर्फ दो रेडियोग्राफर नियुक्त हैं। ऐसे में महज दो रेडियोग्राफर के कंधों पर ही कार्य का भार है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण एक्सरे की सुविधा सिर्फ ओपीडी टाइमिंग में है। इसके बाद मरीजों को एक्स-रे के लिए निजी लैब में अपनी जेब कटवानी पड़ रही है।
चिकित्सकों के खाली पदों पर नियुक्ति के बारे कई बार निदेशालय पर पत्राचार किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही चिकित्सकों की नियुक्ति हो जाएगी। जब तक नई नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक स्टाफ को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।