भिवानी। यहां के ऑयल मिल की शान की चर्चा कभी दूर दूर तक हुआ करती। लेकिन, इन दिनों ऑयल मिलों के अच्छे दिन नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में शहर से करीब आठ से 10 छोटी ऑयल मिलों पर ताला लग गया है। जबकि शहर के साथ जिले भर में बनी करीब 10 बड़ी ऑयल मिलों का उत्पादन भी 75 फीसदी तक घटा है। इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती लागत, घटती सरसों की पैदावार, मजदूरों की कमी व बढ़ता टैक्स है। हालात ये है कि ऑयल मिल संचालकों के समक्ष खर्च निकालने तक की समस्या आ रही है।
थोक विक्रेता कर रहे कमाई
कहने को तो सरसों के तेल के दाम 145 रुपये लीटर है मगर ऑयल मिल संचालकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। ऑयल मिल संचालकों ने बताया कि मिलों में 93 रुपये लीटर शुद्ध तेल है जबकि थोक विक्रेता 145 रुपये तक बेच कमाई कर रहे है। ऑयल मिल संचालकों ने बताया कि उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिल रहा।
इन्हें चाहिए राहत
* मिल संचालक साढ़े पांच प्रतिशत तक टैक्स दे रहे है।
* आढ़तियों से फसल खरीद पर टैक्स में मिले छूट
* ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था में हो सुधार
* ऑयल मिल को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी बनाए सरकार
क्या कहते है ऑयल मिल संचालक
छोटी ऑयल मिल तो शहर से खत्म ही होने को है। पहले 10-12 छोटी ऑयल मिल होती थी। अब दो ही बची है। बड़ी ऑयल मिल हैं। मगर लागत, लेबर समस्या, टैक्स व अन्य व्यवस्थाओं के चलते समस्याएं आ रही है। अब तो लागत निकालना भी चुनौती है।
हरीश रेखान, संचालक, रेखान ऑयल मिल
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लागत पहले से काफी बढ़ गई है। लेबर और अन्य समस्याएं भी है। सरसों की फसल भी पूरी नहीं मिल पाती। प्रतिस्पर्धा बढ़ी है मगर अब लगभग सभी ऑयल मिलों का उत्पादन 25 प्रतिशत तक ही रह गया है।
पवन, संचालक, ऑयल मिल
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लगातार घाटे में जा रही ऑयल मिल को बढ़ावा देने के लिए सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए। इसमें टैक्स में छूट, ट्रांसपोर्ट सुविधा को बेहतर बनाना व अन्य कुछ कदम हो सकते है।
गोविंदराम मकडानिया, संचालक, मकड़ानिया ऑयल मिल
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वह काफी वर्षों से ऑयल मिल चला रहे है, काफी उतार चढ़ाव देखे। मगर अब जो हालात है, उनमें मिल चलाना बहुत मुश्किल है। लागत बढ़ गई है, सरसों मिलती नहीं, मजदूर नहीं मिल रहे। टैक्स व अन्य खर्चों को बोझ बढ़ रहा है। यहीं कारण है शहर से लगातार छोटी ऑयल मिल बंद हो रही है। सरकार टैक्स में छूट व अन्य रियायत दे तो यह उद्योग भी फिर से गुलजार हो सकता है।
मोतीलाल, संचालक, गणेश ऑयल मिल
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बिजली के कारण ऑयल मिलों के सामने बड़ी समस्या आ गई है। सिर्फ 12 घंटे बिजली मिलती है। अब सिक्योरिटी राशि तीन लाख रुपये और ली जा रही है। सात आठ प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस कारण ऑयल मिल उद्योग की स्थिति बेहद खराब है।
आनंदप्रकाश, संचालक, ऑयल मिल, खरक