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Bhiwani News: सीबीआई जांच में देरी से बढ़ी बेचैनी, मनीषा मौत मामले को लेकर आज ढाणी लक्ष्मण में होगी पंचायत

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ढिगावामंडी (भिवानी)। मनीषा मौत मामले की जांच कर रही सीबीआई को 79 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक उसकी मौत का सच सामने नहीं आ पाया है। जांच में हो रही देरी को लेकर मंगलवार दोपहर 12 बजे मनीषा के पैतृक गांव ढाणी लक्ष्मण के मुख्य चौक पर पंचायत बुलाई गई है। पंचायत में किसान नेता सुरेश कोथ सहित प्रदेशभर से लोग जुटेंगे। वहीं आसपास के गांवों से भी ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।
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मनीषा के पिता संजय ने बताया कि तीन सितंबर से सीबीआई मामले की जांच कर रही है। इस दौरान एजेंसी ने सभी गवाहों से पूछताछ कर ली है और घटना स्थल का नए सिरे से मुआयना भी किया है। अधिकारियों ने हर पहलू को बारीकी से खंगाला लेकिन अब तक मनीषा की मौत का रहस्य कायम है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सीबीआई अब जांच में देरी क्यों कर रही है इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है।
गौरतलब है कि लोहारू क्षेत्र के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी 19 वर्षीय मनीषा 11 अगस्त को घर से लापता हो गई थी। 13 अगस्त को उसका शव सिंघानी नहर के पास बरामद हुआ था। इसके बाद 14 अगस्त से परिजनों ने शव के साथ धरना शुरू कर दिया था और 18 अगस्त को गांव में पक्का पड़ाव डाल दिया गया था। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बाद तीन सितंबर से सीबीआई टीम भिवानी पहुंचकर जांच में जुटी हुई है।
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अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मनीषा की मौत हत्या थी या आत्महत्या। परिजन आज भी इस सवाल से जूझ रहे हैं कि आखिर मनीषा सिंघानी नहर के पास किस परिस्थिति में पहुंची थी और उसकी मौत कैसे हुई। विरोधाभासी पोस्टमार्टम रिपोर्टों ने मामले को और उलझा दिया है जिसके कारण सीबीआई भी अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है।

एक सप्ताह पहले दिल्ली लौट गई थी सीबीआई टीम
भिवानी के रेस्ट हाउस में ठहरी सीबीआई की टीम करीब एक सप्ताह पहले ही दिल्ली लौट गई थी। टीम फिलहाल वहीं से मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। मनीषा के पिता संजय ने बताया कि उन्होंने इस दौरान तीन से चार बार सीबीआई अधिकारियों से फोन पर बात की लेकिन हर बार उन्हें केवल जांच जारी रहने का आश्वासन ही मिला है। कई बार अधिकारी व्यस्तता का हवाला देकर फोन काट देते हैं। ऐसे में बेटी की मौत को लेकर परिवार की बेचैनी और बढ़ गई है।
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