बिजली निगम ने पहले एक उपभोक्ता को सात लाख 42 हजार का बिल थमा दिया। ठीक कराने गया तो उसे 11 लाख 38 हजार कर दिया। इतना ही नहीं उसे डिफाल्टर भी बना दिया और घंटों की परेशानी के बाद उसे 1971 रुपये बिल भरने की बात कही गई। अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद उपभोक्ता निगम अधिकारियों को कोसते हुए घर गया।
'यह सब हुआ संजीव कॉलोनी वासी सुभाष के साथ। लोहारू रोड पर दाना फैक्ट्री चलाने वाले सुभाष ने बताया कि उसके बिजली मीटर का दो महीने का बिल नहीं आया था। गली में मीटर रीडिंग लेने आए एक युवक से जब बिल नहीं आने बाबत पूछा तो बोला कि आप तो डिफाल्टर लिस्ट में है और आपका काफी बिल पेंडिंग है। जिसके बाद सुभाष वधवा ने बिजली निगम कार्यालय पहुंचा। यहां पिछले दो महीने का बिल निकलवाया तो उसे सात लाख 42 हजार रुपये का बिल थमा दिया। इतना बिल देख एक अधिकारी के पास कारण और ठीक कराने के लिए गया तो उसे इन्हीं दो महीने का 11 लाख 38 हजार रुपये बिल दे दिया गया। अधिकारियों के चक्कर लगाए तो तीसरा बिल निकाला गया जो कि 23 हजार 813 का था। जब उच्च अधिकारियों से मिला तो उसे 1971 रुपये भरने के लिए कहां गया। इसमें भी सरचार्ज लगा था। जब इसकी भी डिटेल मांगी तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि ये भर दो नहीं तो और कुछ बकाया निकल आएगा।
घर नहीं मिला वरना काट देते कनेक्शन
सुभाष वधवा ने बताया कि मीटर रीडिंग लेने आए युवक ने गलत व्यवहार के साथ बताया कि आप तो डिफाल्टर हो। इस पर सुभाष ने युवक से पूछा कि अगर मैं डिफाल्टर हूं और करोड़ों बकाया है तो कनेक्शन क्यों नहीं काटा। उस पर उसका कहना था कि आपका घर नहीं मिला।