भिवानी। लोहारू में सामने आया नकली नोट का खेल पूरे जिले में फैला है। आरोपियों का नेटवर्क जिले में ही नहीं बाहर भी है। पकड़े गए गैंग के पांच सदस्यों से एक लाख 89 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए है। करीब 81 हजार के नोट ये मार्केट में चला चुके है। पुलिस अब जांच में जुटी है कि नोट आते कहां से थे।
13 नवंबर को लोहारू में नकली नोट के साथ ढिगावा वासी मुकेश को काबू किया गया था। उससे 50 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए। जिसके बाद पूरे स्कैंडल की जांच में सीआईए टीम जुट गई। मुकेश से पूछताछ में टिटानी वासी लोकेश व प्रीतम, कुशलपुरा वासी पवन, सिवानी वासी नरेश अग्रवाल का नाम सामने आया। पुलिस ने इन सभी को काबू किया। इनके आधार पर ही पुलिस इन गिरोह के सरगना ढाणी भगासरा, लोहारू वासी धनेश्वर उर्फ दिनेश को काबू किया। पुलिस ने दिनेश के पास से 78 हजार पांच सौ के नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा लोकेश से 20 हजार, प्रीतम से 15 हजार, पवन से 18 हजार, नरेश अग्रवाल से आठ हजार और मंजीत से 50 हजार के नकली नोट बरामद किए गए। पुलिस अब जांच में जुटी है कि ये नोट कहां से आ रहे थे। इसके लिए पुलिस जांच में जुटी है। पूरे गिरोह का भांडाफोड़ करने वाली सीआईए टीम में इंचार्ज इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह, एएसआई मंजीत व भीम सिंह, हेड कांस्टेबल सज्जन सिंह, राजेश, संदीप सिंह, दिनेश कुमार, जलदीप सिंह, अनिल कुमार, सुरेश कुमार शामिल रहे।
यूं चल रहा था खेल
गिरोह का मुखिया धनेश्वर दिनेश दो लाख 70 हजार रुपये के नकली नोट लाया। उसने करीब एक लाख 91 हजार पांच सौ रुपये मार्केट में चलाने के लिए मंजीत को दिया। मंजीत ने ये नकली नोट लोकेश, पवन, नरेश तक पहुंचाए। सभी करीब 81 हजार रुपये के नकली नोट मार्केट में चला चुके है।
छह सौ रुपये में चलता था एक हजार का नोट
गिरोह का सरगना धनेश्वर दिनेश एक हजार का एक नोट मुकेश को छह सौ रुपये में देता था। मुकेश यहीं एक हजार का नोट सात सौ रुपये में अपने नीचे के चारों लोगों को देता था। चारों इसे एक हजार में चलाते थे। अभी यह खुलासा नहीं हो पाया है कि गिरोह का सरगना नोट कहां से लाता था। वह खुद बनाता था या कहीं और से खरीदता था।