सैनिक कैंटीन में सामान नहीं मिलने पर पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने कैंटीन में रोष जताया। इस दौरान काफी हंगामा हुआ और कर्मचारियों के साथ तीखी नोंक-झोंक भी हुई।
पूर्व सैनिकों ने नारेबाजी की और उच्च अधिकारियों को शिकायत की बात की। कैंटीन में सामान लेने पहुंचे भूतपूर्व सैनिकों व उनके परिजनों को दो बजे के बाद कर्मचारियों ने सामान देने से इंकार कर दिया और बाहर निकाल दिया।
इसके बाद भूतपूर्व सैनिकों और परिजन भड़क गए और हंगामा करना शुरू कर दिया। बाद में पूर्व सैनिकों ने नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया और रक्षा मंत्री, सेनाध्यक्ष व जिला उपायुक्त को तुरंत शिकायत करने की बात कही।
कैंटीन में सुबह आठ बजे ही पूर्व सैनिक अपने परिजनों के साथ सामान लेने पहुंचने लगे थे। इस दौरान तो सब ठीकठाक रहा, लेकिन दोपहर करीब दो बजे जब सैनिक, भूतपूर्व सैनिक सामान लेने पहुंचे तो वहां कर्मचारियों ने सभी को बाहर निकाल दिया।
फरटिया निवासी सुबेदार ईश्वर सिंह, सुबेदार रामफल सुरहेती, सुरेश कारी धारणी, सुबेदार कृपाराम, शांति देवी आर्यनगर, कमला हंसावास आदि ने बताया कि कैंटीन कर्मचारी पहले तो सुबह आठ बजे बुला कर उनको टोकन वितरित करते हैं तथा साथ ही 250 उपभोक्ताओं को ही सामान देने का फरमान जारी कर देते हैं।
अब मनमर्जी से कैंटीन का दरवाजा बंद कर दिया है जो उनका अपमान है। इस मामले में गुस्साए सैनिकों ने कहा कि सैनिक भिवानी कैंटीन के सचिव के अलावा रक्षामंत्री व सेनाध्यक्ष को भी पत्र भेज कर सारे मामले की जांच करने व मनमर्जी चलाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
सैनिक कैंटीन में सामान लेने के लिए प्रतिदिन 250 कार्डधारक निश्चित किए हुए हैं फिर भी यदि समय 3 बजे का हो जाए तो वे इनसे भी कम सैनिकों को सामान दे सकते हैं। भीड़ अत्यधिक होने की वजह से सभी को निश्चित अवधि के दौरान सामान नहीं मिल पाया है। इस वजह से उनमें नाराजगी बढ़ी।
कैप्टन राधेश्याम, कैंटीन प्रभारी