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मेडिकल ऑफिसर पर ठोंका 20 हजार का जुर्माना

Thu, 18 Aug 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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RTI - फोटो : demo
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सिविल अस्पताल के एक चिकित्सक को मेडिकल जांच के लिए आए युवक के बिना रजामंदी एचआईवी जांच करना महंगा पड़ गया। युवक ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अस्पताल में मेडिकल सर्टिफिकेट लेने आया था। जन सूचना अधिकारी कम मेडिकल ऑफिसर सीएचसी बौंदकलां पर स्टेट इनफोरेशन ऑफिसर ने समय पर सूचना नहीं देने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अपीलकर्ता को भी बतौर हर्जाना 5 हजार रुपये देने होंग।
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बौंदकलां निवासी अमित कुमार पुत्र मूल सिंह ने मांगी गई सूचना में बताया है कि 15 अप्रैल 2015 को गांव बौंदकलां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गया था। तब चिकित्सक अंकुर ने उसकी इजाजत के बिना एचआईवी व बलगम टेस्ट करवाया। जब एचआईवी टेस्ट के लिए मना किया तो उसे मेडिकल प्रमाण पत्र नहीं बन पाने की बात कही गई। चिकित्सक द्वारा यह भी कहा गया कि एचआईवी की रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र नहीं बनाया जाएगा।

23 मई को भेजा था नोटिस
राज्य सूचना आयोग की आयुक्त उर्वशी गुलाटी ने चंडीगढ़ से जारी पत्र में बताया है कि सूचना प्राप्तकर्ता अमित कुमार निवासी बौंदकलां ने डिमड स्टेट पब्लिक इनफोरमेशन ऑफिसर कम सीनियर मेडिकल ऑफिसर सीएचसी बौंदकलां से सूचना मांगी थी। इसके लिए आवेदक ने पहला आवेदन 4 मई 2015 को किया, दूसरी अपील 10 मई 2016 को की थी। इस केस में सूचना अधिकारी को 23 मई को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का मेडीकल ऑफिसर ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद सुनवाई के लिए जन सूचना आयोग ने 20 जुलाई की तारीख तय की थी। जिसमें डॉ. अकुंर नागर एसपीआईओ कम मेडिकल ऑफिसर सीएचसी बौंदकलां, डॉ. कृष्ण कुमार डिप्टी सिविल सर्जन भिवानी व आवेदक अमित कुमार शामिल थे। सूचना आयोग ने माना है कि जो सूचना दी गई थी वह गलत व अधूरी थी। इसके साथ ही मेडिकल ऑफिसर ने आयोग द्वारा जारी नोटिस का भी कोई भी जवाब नहीं दिया। कमीशन ने इस मामले में सूचना अधिकारी को 31 अगस्त 2016 तक कम्पलेंस रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
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