भिवानी। दीपावली की रात आठ बजे से रात 12 बजे तक के चार घंटे के दौरान सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में 110 से अधिक मरीज पटाखों से जलने के कारण अस्पताल पहुंचे। अधिकतर के हाथ बुरी तरह झुलसे थे तो एक बच्चे की आंख में पटाखा चलाने के दौरान चिंगारी चली गई। पटाखों से जलने वालों में बच्चे ही नहीं युवा, व्यक्ति व महिलाएं भी शामिल रही। पांच की हालत ज्यादा खराब होने के कारण उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया।
कृष्णा कॉलोनी वासी कमलेश का हाथ पटाखे जलाने के दौरान बुरी तरह झुलस गया। परिजन बाल्टी में हाथ डुबोकर उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। ऐसा सिर्फ एक कमलेश के साथ नहीं हुए बल्कि रात के समय करीब एक सौ मरीज पटाखे चलाने के दौरान झुलसे के इमरजेंसी पहुंचे। पुराना हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से पहुंचे एक बच्चे की आंख में पटाखा गिर गया था और वह आंख ही नहीं खोल पा रहा था। बाद में नेत्र रोग विशेषज्ञ को बुलाया गया और आंखों की सफाई की गई। रातभर पटाखों से जले मरीजों के आने का सिलसिला चलता रहा। रात 12 बजे तक कुल 135 मरीज इमरजेंसी पहुंचे। जिनमें पांच-छह मरीज लड़ाई झगड़े और करीब 10-12 अन्य मामलों के थे। बाकी सभी पटाखों के शिकार हुए।
हाथ में बज गए पटाखे
पटाखों से जलने के कारण इमरजेंसी पहुंचे अधिकतर मरीजों का कहना था कि अचानक हाथ में ही पटाखा जल गया। हाथ जले के कारण इमरजेंसी पहुंचे एक फौजी ने बताया कि अनार चला था मगर हाथ में ही फट गया। उपचार के लिए पहुंचे एक महिला ने बताया कि पटाखे की बत्ती जलाकर फेंकना चाहती थी, लेकिन अचानक ही हाथ में पटाखा फट गया। दरअसल इस बार चाइनीज पटाखों की बिक्री सबसे अधिक रही और ये पटाखे न केवल तेज आवाज कर रहे थे जबकि जलते समय लोगों को बचने का भी बहुत कम समय मिल रहा था। जिस कारण अधिकतर लोगों के हाथों में पटाखे फूटे और हाथ जले।
इमरजेंसी में व्यवस्थाएं पड़ गई कम
इमरजेंसी में रात नौ बजे के बाद मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालात ये रहे कि इमरजेंसी पूरी तरह भर गई। मरीजों की भीड़ के सामने व्यवस्था कम पड़ गई। इमरजेंसी में रात के समय दो चिकित्सक थे। रात नौ बजे के बाद एक के बाद एक मरीज अस्पताल पहुंचे और रातभर भीड़ रही। रात 12 बजे तक पटाखों के कारण जले 110 मरीज इमरजेंसी पहुंचे तो सारी व्यवस्था बेपटरी नजर आई। अधिकतर मरीज गैलरी में बैठे नजर आए तो अनेक इमरजेंसी के प्रतीक्षालय, इमरजेंसी के बाहर बैठ कराहते नजर आए।
पटाखों की क्वालिटी जांच में लारवाही, धड़ल्ले से बिके नकली पटाखे
कहने को तो राकेट, तेज आवाज वाले पटाखे प्रतिबंधित है। मगर जांच का कोई पैमाना नहीं होने के कारण प्रतिबंधित पटाखों की भी दीपावली पर खूब बिक्री हुई। शहर के जैन चौक, बिजलीघर गेड, सराय चौपटा, दादरी गेट पर खुलेआम प्रतिबंधित पटाखे बेचे जा रहे थे। बेचने वालों के पास भी कोई लाइसेंस भी नहीं। इसके अलावा नकली पटाखों की बिक्री भी खूब हुई।
वर्जन ::::
दीपावली पर पटाखों से जलने वालों को तुरंत उपचार देने के लिए पहलेे ही व्यवस्था बना रखी थी। अतिरिक्त चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई थी। पटाखे चलाने से सिर्फ नुकसान ही होता है। लोगों को यह समझना चाहिए। जागरूकता के बाद भी काफी पटाखे जले मरीज अस्पताल आए है।
डा. रणदीप पूनिया, सिविल सर्जन