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करनाल और उत्तम नगर से भी जुड़े हो सकते हैं नकली सिक्कों के सौदागरों के तार

Thu, 13 Oct 2016 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नकली सिक्के बनाने की दो फैक्ट्रियों के भंडाफोड़ के बाद अब दिल्ली पुलिस इनके सरगनाओं की दिल्ली व हरियाणा से जुड़ी परतों की उधेड़बुन में जुट गई है। दो दिन पूर्व पुलिस के हाथ लगी लुथरा ब्रदर्स की मैनेजर नेहा इस दिशा में अहम कड़ी साबित हो सकती है। नेहा से पूछताछ के बाद बुधवार को दिल्ली पुलिस की अलग-अलग टीमों ने दिल्ली के उत्तम नगर व हरियाणा के करनाल में भी दबिश दी। पुलिस टीमों के हाथ लुथरा ब्रदर्स तो नहीं लग पाएं मगर मामले से जुड़े कुछ तथ्य पुलिस के हाथ जरूर लगने का अंदेशा है। हालांकि अभी पुलिस इन जानकारियों को सार्वजनिक न कर गोपनीय ही रख रही है। लुथरा ब्रदर्स का पार्टनर चरखी दादरी निवासी नरेश से की गई पूछताछ भी मामले की तह तक जाने में पुलिस के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।

दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े नकली सिक्के के सौदागर चरखी दादरी निवासी नरेश ने इस गैरकानूनी काम की शुरुआत 2012 में सबसे पहले अपने शहर से ही की थी। इस दौरान वह दादरी में बैठकर ही इस काम को तेजी पकड़ाने के लिए अपने लिंक बनाता गया। धीरे-धीरे उसके संपर्क प्रदेश के साथ-साथ राजधानी में भी हो गए। दादरी में कुछ माह तक यह कारोबार करने के बाद उसने अपना सिक्का जमाने के लिए लुथरा ब्रदर्स सोनू और राजू से भी संपर्क बनाए। इधर, किसी को उस पर शक न हो इसके लिए उदयपुर में केमिकल फैक्ट्री चलाने की बात सभी के सामने कही। कुछ दिन पहले पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस उसे दादरी में भी लेकर आई थी। इस दौरान उसकी निशानदेही पर कुछ बरामद हुआ या नहीं इस बात को भी अभी दिल्ली पुलिस साझा नहीं कर रही। मगर अब नरेश के जेल जाने के बाद लुथरा ब्रदर्स सोनू ओर राजू की मैनेजर नेहा पुलिस को इस गोरखधंधे में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा सकती है। बुधवार को नेहा से पूछताछ के बाद सोनू और राजू की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस ने घंटों करनाल की खाक छानी। यहां उनके नहीं मिलने पर उत्तम नगर में पुलिस टीम ने छापेमारी की।
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नौकरी का झांसा देकर बना लेते थे बंधुआ मजूदर
चरखी दादरी निवासी कार डेकोरेटर नरेश व लुथरा ब्रदर्स के संबंध प्रगढ़ होने के बाद ये मिलकर फैक्ट्री लगाने के लिए जगह तलाशने व इसके लिए श्रमिकों को तैयार करने की रणनीति बनाते थे। सबसे पहले ये बेरोजगारों को रोजगार का लालच देकर पॉलिश के काम में लगाते थे। पॉलिश का काम तो महज 15 से 20 दिन तक ही करते थे। इसके बाद यहां काम करने आए सभी मजदूरों को मशीन व डाई वाले कमरे में बंद कर दिया जाता था। कमरे में जाने से पहले सभी श्रमिकों का मोबाइल व अन्य सामान भी जबरन छीन लेते थे। दोनों फैक्ट्रियों के भंडाफोड़ में श्रमिकों से जुड़ी एक जैसी जानकारियां मिलने के बाद पुलिस ने इन पर आईपीसी की धारा 344 के तहत भी मामला दर्ज किया है।
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हमारी टीमों ने करनाल व उत्तम नगर में भी बुधवार को दबिश दी। मैनेजर नेहा ही सोनू व राजू की गिरफ्तारी में अहम कड़ी साबित हो सकती है। नरेश ने इस गैरकानूनी काम की शुरुआत 2012 में चरखी दादरी से ही की थी। इस खुलासे के बाद पुलिस उसे लेकर दादरी भी आई थी। इस मामले की तह तक जाने का हमारे प्रयास है।
इंस्पेक्टर एपी सिंह, जांच अधिकारी, दिल्ली पुलिस
 
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