भिवानी में रुपयों के लेन-देन में दोस्त द्वारा की गई धोखाधड़ी से परेशान सेवानिवृत्त अधीक्षक ने जहरीला पदार्थ निगल लिया। पीजीआई में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मरने से पहले उन्होंने सुसाइड नोट में दोस्त की धोखाधड़ी और अपनी चिंता को बया किया। पुलिस ने मृतक के दोस्त के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला शनिवार का है। दोपहर बाद करीब तीन बजे पिपलीवाली जोहड़ी क्षेत्र वासी सेवानिवृत्त अधीक्षक करीब 65 वर्षीय रणबीर सिंह ने संदिग्ध परिस्थितियों में जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उसे उपचार के लिए सामान्य अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी हालत गंभीर होने के कारण पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। पीजीआई रोहतक में रविवार अल सुबह करीब तीन बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी जेब से सुसाइड नोट मिला। जिसमें उन्होंने करीब 15-16 साल पुराने दोस्त पर ही धोखाधड़ी के आरोप लगाए। धोखाधड़ी के कारण ही वह तनाव में था और उसने यह कदम उठाया। मृतक के लड़के नीरज ने बताया कि वह एक प्राइवेट एंबुलेंस चलाता है। वह रोहतक में था तो उसके पिताजी का फोन आया कि जल्दी घर आ जा। घर पहुंचा तो कोई नहीं मिला और पिताजी को अस्पताल में ले जा चुके थे। अस्पताल गया तो पिताजी को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। उनकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें उन्होंने पिताजी के ही पुराने साथी पर धोखाधड़ी के आरोप लगाये। नीरज ने बताया कि उसके पिता के साथी पिपलीवाली जोहड़ी क्षेत्र के ही मामनचंद ने उसके पिता से साढ़े तीन लाख रुपये ले रखे थे। इसके बाद दोनों मिलकर एक प्लॉट खरीदा। रजिस्ट्री बंद थी तो पूरे पेमेंट का एग्रीमेंट करवा लिया। मामनचंद ने इस प्लॉट पर स्टील फैक्ट्री के नाम से करीब 52 लाख का लोन ले लिया और सारी राशि लेकर भाग गया। अब साल भर बीतने को है मगर उसका कोई सुराग नहीं लगा। उसके घर जाते है तो परिजन कहते है कि उन्हें नहीं पता कि मामन कहां है। सुसाइड नोट में लिखा है कि मामन ने उन्हें तंग कर लिया। नीरज ने बताया कि उसके पिता गवर्नमेंट टेस्ट बुक एंड प्रिंटिंग में अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त थे।
मामले में जैन चौक चौकी से एसआई धर्मबीर सिंह ने बताया कि जहरीले पदार्थ के सेवन से रणबीर की मौत हुई है। मामनचंद के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है।