अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जिले में हैकर्स लोगों की फेसबुक हैक कर उनके फ्रेंड्स को ठग रहे हैं। हैकर्स मोटी रकम की बजाए पेटीम के जरिये फ्रेंड्स से दो हजार रुपये ले रहे हैं। हैकर्स ने अपना निशाना एक वकील को बनाते हुए उसके चार दोस्तों को ठग लिया। पता चलने पर वकील ने इसकी शिकायत तोशाम पुलिस को दी है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार भुरटाना निवासी सुनील कुमार एडवोकेट ने तोशाम थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी सुनील भुरटाना के नाम से फेसबुक आईडी है। उसकी फेसबुक आईडी को हैकर्स ने 29 अप्रैल को हैक कर लिया था। हैक करने के बाद उसने उसके दोस्तों को मदद करने के नाम पर दो-दो हजार रुपए मांगने शुरू कर दिए। जब उसके दोस्त सतपाल यादव, योगेश, बिजेंद्र व मनीष ने रुपये देने के लिए हां कर दी तो उसने अपना पेटीएम नंबर दिया जिसपर उन्होंने दो-दो हजार रुपये भेज दिए। उसके बाद उन्होंने उससे संपर्क किया तो पता चला कि उनको हैकर्स ने ठग लिया है। इसके बाद उसने पुलिस को शिकयत दी। पुलिस ने हैकर्स के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर क्राइम को रोकने में पुलिस हो रही असफल
फेसबुक आईडी हैक कर हैकर्स लगातार लोगों को ठग रहे हैं जिसकी शिकायत लोगों ने पुलिस को दी हुई है। शिकायत देने के बाद भी पुलिस ना तो हैकर्स तक पहुंच पा रही है और ना ही साइबर क्राइम को रोकने में सफल हो पा रही है। हैकर्स अपना नंबर भी पेटीएम के लिए दे रहे हैं, उसके बावजूद भी वे पुलिस के हाथ नहीं लग रहे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हैकर्स पुलिस से कहीं ज्यादा साइबर की जानकारी रखते हैं।
शिकायत देने के 48 दिन बाद हुई एफआईआर
शिकायतकर्ता एडवोकेट सुनील भुरटाना ने बताया कि 29 व 30 अप्रैल को उसके चार दोस्तों को मैसेज करके पेटीएम पर नंबर रुपये भेजने के लिए कहा। उसके दोस्तों ने उसी समय पेटीएम पर रुपये ट्रांसफर कर दिए। पता चलने पर उसने 30 अप्रैल को ही तत्कालीन एसपी को शिकायत दे दी थी। उसके बाद भी मामले में पुलिस ने 48 दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है जबकि, किसी भी केस में एफआईआर दर्ज होने के बाद ही इंवेस्टीगेशन की जाती है।
आईओ को नहीं पता उसके पास केस है भी या नहीं
मामले को लेकर जब तोशाम थाने में तैनात केस के आईओ एसआई अशोक से बात की तो उन्होंने कहा कि ना तो उसे मामले का पता है, ना ही उसे किसी केस की कोई फाइल दी गई है। उन्होंने कहा कि केस थाने में तैनात उग्रसेन के पास है। जब मामले में उग्रसेन से बात की गई तो उन्होंने भी मामला उनके पास होने से साफ इंकार दिया। एक तो 48 दिन बाद एफआईआर दर्ज होती है। दूसरा आईओ को ये तक नहीं पता कि उनके पास केस है भी या नहीं। ऐसे में शिकायतकर्ता को न्याय मिलेगा या नहीं कोई उम्मीद पुलिस से नहीं की जा सकती।