अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। नेशनल हाइवे नाम सुनते ही जेहन में आता है कि बेहतर सड़क मार्ग मिलेगा। मगर भिवानी में नेशनल हाइवे की परिभाषा हादसों का हाइवे कहें तो गलत नहीं होगी। इसका कारण है नेशनल हाइवे में बने डेढ़ से दो फीट गहरे और करीब पांच से छह फीट तक चौड़े गड्ढे। समस्या रात के समय और बारिश के समय और ज्यादा बढ़ जाती है। क्योंकि शहर में रोहतक गेट से बस स्टैंड के थोड़ा आगे तक लगाई अधिकतर स्ट्रीट लाइटें खराब है। जिस कारण रात के समय ये गड्ढे नजर नहीं आते। बारिश के दौरान जलभराव में ये गड्ढे दिखाई नहीं देते। इस कारण हादसों पर हादसे हो रहे है।
करीब तीन साल पहले तक भिवानी-दिल्ली और भिवानी पिलानी मुख्य मार्ग स्टेट हाइवे था, जिसे बाद में नेशनल हाइवे का दर्जा दिया गया। नेशनल हाइवे का दर्जा मिलने के बाद नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने रोहतक गेट से दादरी गेट, लोहारू रोड के मार्ग को तो बनाया मगर बस स्टैंड से रोहतक गेट तक के करीब दो किलोमीटर मार्ग को छोड़ दिया। अब हालात ये है कि इस मार्ग जगह-जगह गड्ढे बने है। गड्ढे भी छोटे नहीं बल्कि डेढ़ से दो फुट गहरे और करीब चार से पांच फुट तक चौड़े। यानी कि अगर दुपहिया वाहन का पहिया इनमें गया तो संतुलन बिगड़ना और हादसा होना तय है। अब तक अनेक लोग चोटिल हो चुके है। इसके अलावा मार्ग पर समस्या स्ट्रीट लाइट की भी है। रोहतक गेट से बस स्टैंड तक के मार्ग पर बनी अधिकतर स्ट्रीट लाइटें खराब है, तो अनेक पोल पर लाइट ही नहीं है। कहीं टूटी हुई है। रविवार रात को यहां बिल्कुल अंधेरा रहा तो सोमवार को इक्का-दुक्का जलती नजर आई। अंधेरे में ये गड्ढे नजर नहीं आते और हादसे हो रहे है।
2011 में बना था मार्ग
नियमानुसार स्टेट या नेशनल या अन्य मुख्य मार्ग को पांच साल के अंदर-अंदर निर्माण किया जाता है। निर्माण के दौरान जिस ठेकेदार को ठेका दिया जाता है, वहीं ठेकेदार पांच साल तक मार्ग की देखरेख करता है। इसमें क्षतिग्रस्त होने पर पैचवर्क करना या जरूरत पड़ने पर लेयर दोबारा डालना। मगर हैरानी की बात है कि यह मार्ग 2010-11 में बनाया गया था। उस समय यह बीएंडआर के अधीन था। उसके बाद से अब तक लोग इसके दोबारा बनने का इंतजार कर रहे है।
एक ने गंवाई जान तो अनेक हुए घायल
इस मार्ग पर अब तक वैसे तो अनेक हादसे हुए मगर करीब छह माह पहले राधा स्वामी सत्संग भवन के पास हादसा हुआ और बाइक सवार एक व्यक्ति की जान गई। बताया जाता है कि गड्ढों के कारण ही बाइक का संतुलन बिगड़ा और हादसा हुआ। इसके अलावा इस मार्ग पर अब तक अनेक लोग हादसों का शिकार होकर चोटिल हो चुके है। हर रोज हादसे हो रहे है और लोग चोटिल हो रहे मगर ना प्रशासन सुध ले रहा है और ना ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी।
रोहतक गेट से अनाज मंडी ओवरब्रिज तक का मार्ग भी हुआ क्षतिग्रस्त
रोहतक गेट से बावड़ी गेट, दादरी गेट, हनुमान गेट होते हुए अनाज मंडी तक का भी करीब ढाई किलोमीटर का नेशनल हाइवे मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बारिश में जलभराव होने की स्थिति में तो यहां से गुजरना ही आफत भरा रहता है।
ट्वीटर से की शिकायत
मार्ग के खस्ताहाल की प्रशासन भले ही सुधा ना ले रहा हो स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत ट्वीटर से मुख्यमंत्री को की है। शहर वासी अशोक भारद्वाज, राजेंद्र कुमार ने ट्वीटर से शिकायत में सड़क मार्ग में बने गड्ढों की स्थिति बताते हुए जल्द मार्ग ठीक कराने की मांग की है।
सरवाइकल और कमर दर्द का कारण भी बन रहे गड्ढे
शहर की सड़कों के गड्ढों ने सरवाइकल पेन और कमर दर्द के मरीजों की संख्या को भी काफी बढ़ा दिया है। हर रोज 10 से 15 मरीज अकेले सामान्य अस्पताल में सरवाइकल पेन और कमर दर्द के मरीज पहुंच रहे है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या खासी है। फीजियोथेरपी के भी शहर में चार से पांच सेंटर है, जिन पर सरवाइकल पेन और कमर दर्द के मरीज खासी संख्या में पहुंच रहे है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सतवीर धनखड़ ने बताया कि सरवाइकल पेन आज गंभीर समस्या बन गया है। हर रोज खासी संख्या में मरीज आ रहे है। सडक़ें ठीक नहीं होना और लंबी सिटिंग इसका मुख्य कारण है।
मार्ग को बनाने का प्रस्ताव बनाया हुआ है। अप्रूवल मिलने के बाद इसे बनाया जाएगा। गड्ढों को पहले भी रोडे़ डालकर भरवाया गया था। बारिश में पानी ठहरने से सड़क टूटती है। जल्द ही गड्ढों को फिर से भरवाया जाएगा।
-हनुमंत सिंह, एक्सईएन, एनएचएआई, रोहतक
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