फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चोरी का सामान बरामद करने के लिए नेताओं, पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगा रही पीड़ित महिला

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

भिवानी। बाग कोठी की गली नंबर-5 में स्थित मकान में साढ़े तीन साल पहले चोरों ने एक मकान को अपना निशाना बनाते हुए वहां से 40 लाख की नकदी व गहनों की चोरी की। इसपर एफआईआर नंबर 750 दर्ज तो हुई, लेकिन ट्रेस नहीं। समय बीतता गया और अधिकारी बदलते गए। चोरी का खुलासा नहीं हुआ तो पीड़िता ने ग्रीवेंस कमेटी का रूख किया। 2 साल में 12 ग्रीवेंस कमेटी में परिवाद रखा, फिर भी नतीजा शून्य रहा। ढाई महीने पहले तत्कालीन एसपी सुरेंद्र भौरिया ने केस को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया, जहां पर भी फाइल धूल फांक रही है। हालात यह हो गए कि पीड़िता ने न्याय के लिए लाखों रुपये भी खर्च कर दिए।
जी हां, हम बात कर रहे हैं बाग कोठी की गली नंबर-पांच में रहने वाली गायत्री पत्नी पवन के घर हुई चोरी की। घर में हुई चोरी ने उसे इस कदर तोड़कर रख दिया कि उसके सिर लाखों रुपए का कर्जा हो गया। पति हार्ट पेसेंट और बेटा भी बेरोजगार। गायत्री देवी ने बताया कि 29 नवंबर 2014 को चोर घर में रखी नकदी और गहने चोरी कर ले गए। ये चोर भी कोई ओर नहीं बल्कि उससे दोस्ती कर दुकान से सामान ले जाने वाले थे। उन्होंने बताया कि पुलिस ने केस दर्ज तो कर लिया लेकिन चोरों को नहीं पकड़ पाई।
विज्ञापन

दवाई दिलवाने के लिए ले गई थी साथ, पीछे से करवा दी चोरी
गायत्री देवी ने बताया कि 29 नवंबर 2014 को उसके पास से सामान ले जाने वाली ममता आई और दवाई दिलवाने की बात कहते हुए उसे व उसके लड़के को अपने साथ ले गई। उसके बाद वह अपने किसी रिश्तेदार के घर ले गई। इस दौरान वह फोन पर लगातार बात करती रही। जब वे शाम को घर पहुंची तो घर से गहने और नकदी चोरी मिली।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
लाखों रुपये की चोरी को लेकर गायत्री देवी ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उसने चोरों के नाम बताए थे, जिसके बावजूद भी पुलिस ने चोरों को नहीं पकड़ा। उसने अपनी शिकायत में धोलिया, मंदीप, संदीप व ममता के नाम दिए थे। पुलिस ने शुरू में कहा कि 4 दिन में चोरों को पकड़ लेेंगे, लेकिन पुलिस ने आज तक भी चोरों को नहीं पकड़ा है।
बदलते रहे अधिकारी, नहीं मिला इंसाफ
साढ़े तीन साल में कई अधिकारी बदले, लेकिन कोई भी गायत्री देवी को इंसाफ नहीं दिला पाया। जो भी नया एसपी आता तो वह उससे मिलकर पूरे मामले से अवगत करवाती। हर अधिकारी उसे सिर्फ आश्वासन ही दे पाया।
संतरी से लेकर मंत्री तक लगा चुकी गुहार
गायत्री देवी ने न्याय के लिए 10 बार तो हिसार आईजी ऑफिस के चक्कर लगाए, और ना जाने कितने चक्कर एचएचओ से लेकर एसपी ऑफिस के। न्याय नहीं मिलने पर उसने डीजीपी को भी कई बार न्याय के लिए लेटर लिखा लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने उसके बाद सीएम विंडो पर भी शिकायत की, जिसका कोई फायदा नहीं हुआ। सीएम मनोहर लाल जब भिवानी में आए तक भी वे उनसे मिले और मामले से अवगत करवाया गया। उन्होंने आदेश भी दिए और एसपी भी उसके घर पहुंचा, लेकिन चोरों को नहीं पकड़ गया।
विज्ञापन

जर्जर घर में रहने को मजबूर परिवार
गायत्री देवी ने करीब 22 साल पहले घर पर ही साड़ियों की दुकान की थी जिससे उसके परिवार को गुजारा चलता था। उसने पहले अपनी बेटियों की शादी की और उसके बाद घर बनाने के लिए पूंजी जमा करनी शुरू कर दी। पूंजी जमा होने के बाद वह घर बनाने वाली ही थी कि उससे पहले चोरों ने पूंजी पर हाथ साफ कर दिया। अब जर्जर हो चुके घर में परिवार रहने का मजबूर है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें