अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय में लाखों रुपये घोटाला करने का मामला सामने आया है। इस मामले में टर्मिनेट की गई एक पूर्व अकाउंटेंट ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अब कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। इस केस की विजिलेंस से जांच करवाई गई है। अब इस बारे में कोर्ट ने जवाब मांगा है। वहीं इसी मामले में टर्मिनेट की गई पूर्व अकाउंटेंट को भी विभाग की ओर से पत्र जारी कर लाभार्थियों के खाते में अधिक राशि जमा कराने और जिन लाभार्थियों के खाते में राशि नहीं भेजनी थी, उनके खातों में भी राशि भेजने के आरोप लगा जवाब मांगा गया है।
मामला 2013 का है। जिला संरक्षण अधिकारी कार्यालय में अनुबंध आधार कार्यरत अकाउंटेंट ने निदेशालय में शिकायत कर आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी बोगस बिल बनाकर पास करवा रहे हैं। बाजार रेट से ज्यादा रेट के बिल बनाए जा रहे हैं। इस शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई। छह अप्रैल 2018 को उपायुक्त कार्यालय में शिकायत की गई। जिसके बाद इसकी जांच की जिम्मेवारी जिला परिषद के तत्कालीन सीईओ को सौंपी गई। इसी दौरान अनुबंध आधार पर लगी अकाउंटेंट को बर्खास्त कर दिया गया।
इस पर महिला कर्मी ने प्रधानमंत्री को शिकायत भेजी और हाईकोर्ट में अपील की। प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत के प्रधान सचिव ने संज्ञान लिया और इसकी विजिलेंस से जांच के निर्देश दिए। 28 जनवरी 2019 में विजिलेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। जांच रिपोर्ट में जिन-जिन दुकानों से स्टेशनरी सामान खरीदने, खाद्य सामग्री खरीदने के बिल बनाए गए थे, वहां जाकर जांच-पड़ताल की और दुकानदारों के बयान कलमबद्ध किए। विजिलेंस की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई।
21 फरवरी को कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद सरकार को पत्र जारी कर इस बारे में जवाब मांगा गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
शिकायतकर्ता और गवाहों पर दिया जा रहा दबाव
शिकायतकर्ता और इस केस में गवाही देने वाले कार्यालय के कर्मचारियों पर केस उठाने का दबाव दिया जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके भाई तक पर दबाव बनाया जा रहा है कि हाईकोर्ट से केस उठा लिया जाए। शिकायतकर्ता ने बताया कि विजिलेंस रिपोर्ट में भी उसकी शिकायत को सहीं पाया है।
लाभार्थियों के खातों में डाली है अधिक राशि
मामले में सोमवार को एक और नया मोड़ आया। जिला संरक्षण अधिकारी ने टर्मिनेट की गई महिला कर्मचारी को एक पत्र भेजा है। जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि जिस दौरान वह अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थी, उस दौरान स्कीम के लाभार्थियों के खाते में जो राशि डाली गई वह गलत है। लाभार्थियों के खातों में अधिक राशि डाली गई और जिन लाभार्थियों का लाभ बंद करना था, उनके खातों में भी राशि डाल दी गई। इसका जवाब तीन दिन में दें। बर्खास्त हो चुकी महिला कर्मी ने इस पत्र के बारे में बताया कि उसके ऊपर हाईकोर्ट से केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और इसी के तहत यह पत्र जारी किया गया है। अकाउंट में राशि डालने की जिम्मेवारी उसकी नहीं थी। उसे तो लाभार्थियों की जो लिस्ट दी जाती, उसी के अनुसार राशि लाभार्थियों के खाते में डाली जाती।
18 पेज की विजिलेंस रिपोर्ट में सामने आया है कि फर्जी बिल बनाकर उन्हें पास करवाने के लिए अकाउंटेंट पर दबाव बनाया गया। उसके मना करने पर उसे टर्मिनेट कर दिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा है। 12 मार्च को टर्मिनेशन आर्डर पर सुनवाई होगी।
संदीप ठाकन, एडवोकेट
महिला कर्मी ने कुछ ऐसे खातों में राशि डाली जो नहीं डालनी चाहिए थी। इसके अलावा कुछ के लाभ बंद कर दिए थे। लेकिन उनके खातों में भी लाभ राशि डाल दी। इसके लिए जवाब मांगा है। जिन्हें लाभ दिया गया और नहीं दिया जाना था, या जिन्हें ज्यादा दिया गया, उन्हें भी नोटिस जारी कर राशि विभाग में जमा कराने के लिए कहा गया है।
सुनीता यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग