शहर में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते वामपंथी पार्टियों के पदाधिकारी।
भिवानी। वामपंथी पार्टियों के राष्ट्रीय आह्वान पर सोमवार को सीपीएम और सीपीआई ने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून में किए गए बदलाव के विरोध में शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को बदलकर ‘विकसित भारत जीरामजी’ नाम देने का विरोध करते हुए राष्ट्रपति के माध्यम से इसे रद्द कर पुराने रोजगार गारंटी कानून को बहाल करने की मांग को लेकर ज्ञापन भिजवाया। उपायुक्त की ओर से समाज कल्याण अधिकारी राजकुमार ने ज्ञापन प्राप्त किया।
ज्ञापन सौंपने से पहले दोनों दलों के कार्यकर्ता ठाकुर बीरसिंह पार्क में एकत्र हुए, जहां सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता माकपा की ओर से सुखदेव पालुवास और भाकपा की ओर से कामरेड फूल सिंह इंदौरा ने की। सभा को संबोधित करते हुए माकपा जिला सचिव कामरेड ओम प्रकाश तथा भाकपा जिला सचिव फूल सिंह इंदौरा और धर्मबीर बामला ने कहा कि राजग-भाजपा की केंद्र सरकार शुरू से ही मनरेगा कानून को कमजोर और समाप्त करने का प्रयास करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चालाकी से रोजगार गारंटी कानून को एक योजना में बदल दिया और केंद्र सरकार का बजट 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया, जबकि शेष 40 प्रतिशत बजट की जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई।
वामपंथी नेताओं ने कहा कि राज्यों के पास टैक्स वसूली का अधिकार सीमित है, ऐसे में अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फसल कटाई और बुआई के सीजन में मनरेगा का काम नहीं लगाया जाएगा, जिससे मजदूरों को भारी नुकसान होगा। नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि पुराने रोजगार गारंटी कानून को बहाल नहीं किया गया तो देशभर में मजदूरों की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ सशक्त आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में सीपीएम नेता करतार सिंह ग्रेवाल, रामफल देशवाल, राजेश कुंगड़, मास्टर वजीर सिंह, रतन कुमार जिंदल, सज्जन कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।