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मनोज और ऊषा की जमानत याचिका खारिज

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भिवानी। असम निवासी नाबालिग से गैंगरेप और छेड़छाड़ मामले में भिवानी अदालत ने मनोज और चरखी दादरी अदालत ने ऊषा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। ऊषा ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी।
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असम निवासी एक नाबालिग को काम दिलाने के बहाने दिल्ली लाया गया और वहां से उसे चरखी दादरी भेज दिया गया है। आरोप है कि वहां पर ऊषा नाम की महिला ने उसे खरीद लिया तथा उससे देह व्यापार कराने लगी। वह बच्ची किसी तरह से भागकर दो लोगों के पास पहुंची। वे उसे पुलिस के पास ले गए। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया और सीडब्ल्यूसी चरखी दादरी को भी इसकी सूचना दी गई।
सीडब्ल्यूसी चरखी दादरी ने बच्ची को बाल आश्रम भिवानी में भेज दिया। वहां पर काउंसलर हरिओम ने काउंसिलिंग के बहाने उस नाबालिग बच्ची के साथ छेड़छाड़ कर दी। इसका पता चलने पर हरिकिशन के खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया गया। उसके बाद से आरोपी हरिकिशन फरार चल रहा है।
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मनोज ने बनाई थी काउंसिलिंग की वीडियो
छेड़छाड़ के बाद एलपीओ मनोज, सीडब्ल्यूसी की महिला सदस्य प्रियंका धूपड़, तत्कालीन महिला थाना प्रभारी कृष्णा और एक प्रोटेक्शन अधिकारी ने नाबालिग की अवैध रूप से काउंसिलिंग की। इसमें प्रियंका धूपड़ ने नाबालिग पर हरिकिशन के खिलाफ दी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया तथा मनोज ने उसकी वीडियो बनाई। इस मामले में मनोज के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
ऊषा ने शनाख्त को बनाया था आधार
चरखी दादरी में गैंगरेप मामले में आरोपी ऊषा ने बच्ची द्वारा शनाख्त नहीं कर पाने को जमानत का आधार बनाया था। मगर अदालत ने इस आधार को मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उस समय बच्ची कोरोना से पीड़ित थी और मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं थी। अदालत ने शनाख्त के तरीके को भी गलत माना और अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया।
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अगली सुनवाई 28 को
मनोज ने अदालत में जमानत के लिए अपील की थी। मगर उसे खारिज कर दिया गया है। अब इस मामले में आगामी सुनवाई 28 जून को होगी।
- धर्मली देवी, प्रभारी, महिला थाना।
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