भिवानी। परिवार की महत्वता को याद रखने के लिए हर साल दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस 15 मई को मनाया जाता है। एक दौर था जब हर सदस्य परिवार में रहकर खुश था। मगर आज के समय में हर कोई अलग रहना पसंद करता है क्योंकि वह परिवार की अहमियत को नजर अंदाज कर रहा है। खास करके युवा पीढ़ी अकेले रहना ही पसंद करती है। इसकी वजह नौकरी, बाहर रहकर पढ़ाई करना या विदेश में जाकर रहना है।
पारिवारिक विवाद के चलते भी अधिकतर लोग अपने परिवार से अलग हो रहे हैं। लोगों की शादियां टूट रही हैं। जिस वजह से परिवार पर प्रभाव पड़ रहा है। जब पारिवारिक मुद्दे परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचते हैं तो वहां पर अधिकारियों की अधिकतर कोशिश यही रहती है कि यह परिवार टूटे न बल्कि फिर से एक साथ पहले की तरह रहने लगे। छोटी-छोटी बातों पर मियां बीवी में झगड़ा हो रहे हैं और यही झगड़ा बड़ा मुद्दा का रूप लेकर परामर्श केंद्र तक पहुंच रहे हैं। घरेलू हिंसा से लेकर दहेज और रेप जैसे मामले परामर्श केंद्र में अधिक आ रहे हैं।
महिला थाना भिवानी की बात की जाए तो यहां पर करीब एक महीने में 100 से अधिक पारिवारिक विवाद के मामले दर्ज होते हैं। जिनमें से 90 फीसदी केस में रजामंदी हो जाती है। उनकी कई बार काउंसिलिंग करके परिवार के अहमियत को बताते हुए उन्हें फिर से एक कर देते हैं। उनकी यह पूरी कोशिश रहती है कि मियां बीवी की वजह से कोई परिवार न टूटे।
घरेलू हिंसा के मामले अधिक
पारिवारिक विवाद के मामलों की बात करें तो इसमें दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा के केस ज्यादा सामने आ रहे हैं। दिन प्रतिदिन यह केस बढ़ते ही जा रहे हैं। जनवरी से लेकर अब तक भिवानी महिला पुलिस थाना में घरेलू हिंसा के कुल 35 मामले आए, जिनमें से पांच मामले सुलझा दिए गए और दो परिवार अलग होकर ही माने। जबकि 6 मामलों की जांच पड़ताल अभी चल रही है। सरकार द्वारा महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सुविधा दी जा रही है जिसका कई महिलाएं गलत फायदा भी उठा रही हैं। बात छोटी सी होती है और वह ससुराल पक्ष के पूरे सदस्य पर मामला दर्ज करवा देती हैं।
सहनशीलता की कमी
आज के समय में जो परिवार टूट रहे हैं इसका सबसे बड़ा कारण है सहनशीलता की कमी। क्योंकि पति-पत्नी एक दूसरे की सुनकर राजी नहीं है। अगर एक कुछ कहता है तो दूसरा उससे दुगना सुनने के लिए तैयार रहता है। यह हल केवल अरेंज मैरिज नहीं बल्कि लव मैरिज में भी है। जब यह मामले महिला थाना में पहुंचते हैं तो वहां के पुलिस अधिकारियों की पूरी कोशिश यही रहती है कि इन्हें किसी भी तरह समझ कर एक किया जाए। पर जिन्होंने ठान ही ली है कि अलग रहना है तो उनके मुकदमे चलते हैं।
हम दोनों पक्षों को बुलाकर समझाते हैं : कमलेश देवी
भिवानी महिला पुलिस थाना की एसएचओ कमलेश देवी ने बताया कि हम दोनों पक्षों को बुलाकर बहुत समझाते हैं। पति-पत्नी छोटी-छोटी बात का मुद्दा बना लेते हैं जिसका असर बच्चा और परिवार दोनों पर पड़ता है। हम तो यही चाहते हैं कि कोई भी परिवार न टूटे। सब मिलकर खुश रहे। सहनशीलता होना बहुत जरूरी है फिर वह चाहे लड़के में हो या लड़की में। क्योंकि अगर परिवार चलाना है तो छोटी-मोटी बातें सहना भी जरूरी है। पत्नी को अपना फर्ज और पति को अपना फर्ज निभाना चाहिए। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का गलत फायदा भी उठा रही है। उनका कहना है कि उनके पास 18 केस जनवरी से लेकर अब तक आएं हैं। वो कहती हैं कि हमारे पास जो भी मामला आता है हम पहले उसकी अच्छे से जांच पड़ताल करते हैं।
काउंसलिंग से जोड़ते हैं परिवार
महिला थाना में जब पारिवारिक मामला पहुंचता है तो वह पहले दोनों पक्षों को बुलाकर तीन बार काउंसलिंग करते हैं। इसके बाद एडीआर दफ्तर में भेजते हैं। कुल 6 काउंसलिंग दोनों पक्षों की होती है उसके बाद थाने में भेज दिया जाता है। थाने में भेजने के बाद भी एक बार और परामर्श केंद्र में बुलाया जाता है ताकि परिवार न टूटे। इसके बाद भी जब वह नहीं मानते तो मुकदमा शुरू होता है और मुकदमे के बाद भी परामर्श केंद्र के अधिकारियों की यही कोशिश रहती है कि उन्हें बुलाकर समझाया जाए और रिश्ता टूटने से बच सके। मुकदमा लंबा चलता है इस दौरान भी हमारी यही कोशिश रहती है कि पति पत्नी आपस में राजामंदी कर ले और परिवार जुड़ जाए। काउंसलिंग सेशन में दो एएसआई कमलेश और राजकला, एक इंस्पेक्टर प्रोमिला, एक हेड कांस्टेबल प्रियंका और एक कांस्टेबल नीलम बैठती है।
छोटी सी अनहोनी हो गई थी पर अब जिंदगी अच्छे से चल रही है: कुलदीप
गोलपूरा के रहने वाला कुलदीप ने बताया कि उनकी पत्नी उज्ज्वल के साथ छोटी सी बात पर कुछ अनहोनी हो गई थी। जब मामला महिला थाना पहुंचा तो वहां पर हम दोनों के परिवार को बुलाया गया। हमारी काउंसलिंग की। हमें अच्छे से समझाया गया। हमारी रजामंदी हो गई। अब हम दोनों अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। कोई गिला शिकवा नहीं है।