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मानकों को ताक पर रखकर पीपीई किट बनाने को लेकर पुलिस सतर्क

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नकली पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट तैयार करने का खेल जिला पुलिस व प्रशासन की ठीक नाक तले धड़ल्ले से चल रहा है। अमर उजाला में रविवार को प्रकाशित अंक में नकली पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट से कैसे सुरक्षित रहेंगे कोरोना के जांबाज शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद जिला व पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। मामले की ट्वीटर हैंडल के जरिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री हरियाणा, हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री को भी भेजी गई है।
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अमर उजाला की इस दिशा में की गई पड़ताल में यह भी उजागर हुआ है कि घरों के अंदर महिलाओं व बच्चों द्वारा घरेलू सिलाई मशीन से तैयार की जा रही नकली पीपीई किट को तैयार कराने में मात्र 70 रुपये का खर्च आ रहा है। जबकि फैक्टरी मालिक और दलाल इन्हें 700 रुपये तक मार्केट में बेच रहे हैं। नॉन वुवेन कपड़े से तैयार की जा रही नकली पीपीई किट मेडिकल मापदंडों पर भी खरी नहीं उतर रही है। इस नकली किट पर न तो ईएसआई मार्का है और न ही तैयार करने वाली कंपनी का कोई ब्रांड। इस मामले में कई सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस व जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत भेजी है।
हरियाणा में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद से ही नॉन वुवेन कपड़े जिससे कैरी बैग तैयार किए जा रहे हैं। इसी कपड़े से मास्क और पीपीई किट यानी गाउन तैयार किए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार ये मेडिकल लाइन में इस्तेमाल किया जाता है। इस समय विश्वभर में कोरोना वायरस के संक्रमण ने भयावह स्थिति पैदा कर दी है। अगर गलती से भी कोई चिकित्सक, नर्स या फिर सुरक्षा में तैनात कोई कर्मचारी इस नकली पीपीई किट को पहनकर खुद को सुरक्षित रखने की भूल कर बैठेगा तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद पुलिस व जिला प्रशासन में भी हड़कंप मचा है।
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शहर के इन इलाकों में तैयार हो रहे हैं नकली पीपीई किट
शहर के अधिकांश हिस्सों में घरों के अंदर ही महिलाएं व बच्चे नकली पीपीई किट तैयार किए जाने के गोरखधंधे में धड़ल्ले से जुटे हैं। इन्हें एक किट तैयार के नाम पर मामूली पैसों का लालच दिया गया है। लेकिन इस गोरखधंधे में जुटे फैक्ट्रियों के संचालक और दलाल मोटा मुनाफा कूटने के चक्कर में जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर के विकास नगर, कीर्ति नगर, बैंक कॉलोनी, कृष्णा कॉलोनी, जीतुवाला जोहड़ 27 फुटा रोड, खाड़ी मोहल्ला, गोशाला मार्किट, हनुमान ढाणी, हनुमान गेट, दादरी गेट, पुराना बस स्टैंड, गुजरों की ढाणी, बागकोठी, सिविल लाइन थाने के पीछे कुम्हारों का मोहल्ला, जैन चौक क्षेत्र, रामगंज मोहल्ला, आंबेडकर कॉलोनी, उत्तम नगर सहित शहर की अनेक कॉलोनियां शामिल हैं।
मेरे संगठन के समक्ष यह मामला आया था। इस मामले में पहले तो संगठन ने अपने तौर पर काफी सुबूत जुटाए और फिर इस मामले की शिकायत पीएमओ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा के सीएम, स्वास्थ्य मंत्री सहित भिवानी के डीसी और एसपी को दी गई है। हाल ही में सरकार ने अमेंडमेंट कर ईसी एक्ट(जरूरी वस्तु अधिनियम) के दायरे में मेडिकल वस्तुओं को शामिल किया है। सरकार की अनुमति के बगैर न तो इनकी कोई बिक्री कर सकता है और न ही इनका निर्माण कर सकता है। कालाबाजारी भी शामिल की गई है। इसमें संबंधित विभागों के साथ मिलकर पुलिस प्रशासन गहराई में जांच कराए तो बड़ा स्कैंडल सामने आएगा। इसके कुछ तथ्य पुलिस को भी दिए गए हैं।
- बृजपाल परमार, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।
मैंने सुबह अमर उजाला में खबर देखी तो ट्वीटर हैंडल पर पीएम कार्यालय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, सीएम और स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत भेजी है। साथ में अखबार की फोटो भी ट्वीटर हैंडल पर डाली गई है। शिकायत में यह भी कहा है कि बिना मापदंड के तैयार की जा रही नकली पीपीई किट कोरोना योद्धाओं की जिंदगी से खिलवाड़ है।
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- शिवकुमार प्रजापति, सामाजिक कार्यकर्ता।
मामले में उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।। नियमानुसार अगर कार्रवाई बनती है तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- वीरेंद्र सिंह, डीएसपी
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