भिवानी। लोहारू क्षेत्र के गांव फरटिया भीमा में छात्रा दीक्षा आत्महत्या मामले में वीरवार को भिवानी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विक्रमजीत अरोड़ा की अदालत ने सिंघानी के शारदा कॉलेज में प्रबंध कमेटी सदस्य हनुमान सिंह की याचिका पर आरोपी व पीड़ित पक्ष की बहस सुनी। इसके बाद अदालत के सख्त रुख को देखते हुए आरोपी हनुमान के वकील ने कोर्ट से अपनी याचिका वापस लेने का आग्रह किया। इसे स्वीकार करते हुए अदालत ने आरोपी हनुमान की जमानत याचिका को वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दिया।
इससे पहले अदालत में बहस करते हुए आरोपी हनुमान के वकील ने तर्क रखा कि उनके क्लाइंट को इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उसका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। जिस पर पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत में अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि आरोपी हनुमान कॉलेज का संचालक है और इसके साथ-साथ कॉलेज के ट्रांसपोर्ट का काम देखता है। फीस न भरने को लेकर आरोपी हनुमान सिंह, प्रिंसिपल और बेटे राहुल के साथ मिलकर छात्रा को प्रताड़ित करने का काम कर रहे थे। उस पर गलत काम का दबाव बना रहे थे।
पीड़ित के वकील ने अदालत को बताया कि इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने स्थानीय पुलिस से जांच ट्रांसफर कर स्टेट क्राइम ब्रांच को दे दी गई है जो अभी आरोपी के खिलाफ और तथ्य इकट्ठा कर रही है।
उन्होंने अदालत को बताया कि अभी इस मामले में दो-तीन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है। मामले की जांच उच्च जांच एजेंसी द्वारा जारी है। उन्होंने अदालत को बताया कि अगर इस मामले में आरोपी को जमानत दी गई तो वह केस के तथ्यों तथा गवाहों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। यही नहीं आरोपी परिवार अभी दहशत में है और आरोपी से पीड़ित परिजनों को खतरा है। दोनों पक्षों की जिरह के बाद अदालत के रुख को देखते हुए आरोपी हनुमान सिंह के वकील ने आरोपी की जमानत याचिका वापस ले ली। जिस पर अदालत ने जमानत याचिका को डिसमिस्ड एज विदड्रान करते हुए खारिज करने का आदेश दिया।