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Bhiwani News: सिविल अस्पताल का दर्जा सुविधा सब स्टेशन से भी ठप

Tue, 21 Apr 2026 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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कैरू का सेठ सोहनलाल सिविल अस्पताल। 
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कैरू। सेठ सोहनलाल सिविल अस्पताल में 10 वर्षों से अस्पताल में स्थायी डाक्टर नहीं होने से व्यवस्था गड़बड़ा गई है। कहने को दर्जा तो सिविल अस्पताल का है लेकिन सुविधा व संसाधन विकास में सब स्टेशन से भी ठप है। लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने वाला अस्पताल आज खुद बीमार चल रहा है।
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मरीजों से पहले अस्पताल का इलाज जरूरी है। डाॅक्टर के बिना मरीज परेशान हो रहे हैं। अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और मरीजों की समस्या को देखते हुए शासन व प्रशासन दोनों ही सुस्त पड़े हुए हैं। सेठ फूलचंद के आग्रह पर सन् 1959 में हरियाणा पंजाब के संयुक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री कैरो सिंह प्रताप ऊंट पर सवार होकर अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए आए थे। 10 किमी तक क्षेत्र में उस समय स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए चर्चा में रहा।
दूसरी ओर अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग खस्ता होकर सन् 2023 में लोक निर्माण विभाग बीएंडआर ने कंडम घोषित हो चुकी है। जान माल का खतरा होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को सरकारी स्कूल के तीन कमरो़ं में संचालित है। स्कूल और अस्पताल एक ही चहारदीवारी में चलने से कुछ अव्यवस्थाएं भी बनी हुई है। ना तो बच्चे मन लगाकर पढ़ पा रहे हैं और ना ही मरीजों को शांति व सुकून भरा माहौल मिल रहा है।
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अस्पताल की भवन निर्माण संबंधित फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। बिना डाॅक्टर के क्षेत्र के मरीज इस अस्पताल से तौबा करने लगे हैं और मजबूरी में अपना उपचार निजी क्लीनिक में जाकर करवा रहे हैं। गांव व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते यहां डाक्टरों की स्थायी स्थापना व नए भवन के लिए जमीन नहीं उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जब अस्पताल में डाॅक्टर ही नहीं होंगे तो मरीज उपचार की किससे उम्मीद रखे।
फरवरी 2023 में स्थायी तौर पर मेडिकल आफिसर अभिषेक ने यहां का चार्ज लिया था। जुलाई 2023 में ट्रांसफर हो गया, करीब 5 महीने ही रहे। इसके बाद मेडिकल आफिसर अनुज ने दिंसबर 2024 में कार्यभार संभाला था और जनवरी 2025 को पीजी एमडी कोर्स करने चले गए। एक महीना ही वह ड्यूटी पर रहे तब से मेडिकल ऑफिसर की सीट खाली पड़ी है।





अस्पताल में वैसे तो डाक्टरों की कमी है ही लेकिन आठ बिस्तरों वाले अस्पताल में प्रसव तक की समुचित सुविधा नहीं है। महिला रोग विशेषज्ञ का अभाव ज्यादा ही खल रहा है। महिलाओं को मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराना पड़ रहा है। डिलीवरी के लिए कैरू या भिवानी जाना पड़ता है।



-पंकज शर्मा,ग्रामीण।










ओपीडी औषधि अधिकारी के सहारे, एक भी सफाई कर्मचारी नहीं



वर्तमान की हालत दयनीय हो गई है यहां पर एक सफाई कर्मचारी तक नहीं है। सफाई व्यवस्था भी चरमरा चुकी है। छह सीट चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की है। एक औषधि अधिकारी ही यहां ओपीडी चला रहा है। उसको भी कैरू सीएचसी या दूसरे सब स्टेशन में डेपुटेशन पर बुला लिया जाता है। यहां स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।



-उमेश, ग्रामीण।







यह अस्पताल सिविल दर्जे का है और अलग से आरोग्य मंदिर का उप स्वास्थ्य केंद्र है। विभाग को बार बार पत्र भेजा जा चुका है उच्चधिकारी को मामला संज्ञान में है। चिकित्सकों की ड्यूटी लगाना विभाग का काम है। - गोपीराम, औषधि अधिकारी देवराला।
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