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छुट्टी गए इमरजेंसी डॉक्टर तो बिगड़ी सामान्य अस्पताल की व्यवस्था

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04 फोटो ओपीडी में महिला रोग विशेषज्ञ का बंद पड़ा कक्ष। - फोटो : Bhiwani
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सामान्य अस्पताल में पिछले करीब 10 दिन से व्यवस्थाएं बिगड़ी हुई है और गर्भवती महिलाओं को भी इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। विशेषज्ञ नहीं होने के कारण महिलाओं को पीजीआई रोहतक रेफर किया जा रहा है। ऐसा ही नजारा मंगलवार को सामान्य अस्पताल में देखने को मिला। दरअसल इमरजेंसी के चिकित्सक छुट्टी पर है और ओपीडी के महिला रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी इमरजेंसी में लगाई। ऐसे में महिला मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण सिजेरियन के केसों को वापस भेजा गया।
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सामान्य अस्पताल में प्रधान चिकित्सा अधिकारी के अवकाश पर जाने के बाद से व्यवस्थाएं चरमराई हुई है। खासकर गर्भवती महिलाओं को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। सात से 11 दिसंबर तक अस्पताल में कोई भी महिला रोग विशेषज्ञ नहीं थी। बाद में डॉ. अज्ञा राठौर ने ज्वाइन किया तो उन पर ओपीडी, मैटरनिटी वार्ड का वर्क लोड हो गया। ऐसे में सिजेरियन नहीं हुए।
मंगलवार को एक और समस्या खड़ी हो गई है। वह है इमरजेंसी में मॉर्निंग शिफ्ट में कोई चिकित्सक नहीं होना। इमरजेंसी के मॉर्निंग शिफ्ट में जिन डॉक्टर की ड्यूटी थी, वे अवकाश पर चले गए। ऐसे में व्यवस्था बनाने के लिए अस्पताल में मौजूद एकमात्र महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अज्ञा राठौर की इमरजेंसी में ड्यूटी लगाई गई। जिससे सारी व्यवस्था बिगड़ी और ओपीडी, मैटरनिटी वार्ड में गर्भवती महिलाएं परेशान रही। औसतन ढाई सौ से तीन सौ तक महिला विभाग की ओपीडी रहती है। अधिकतर महिलाएं बिना इलाज के ही लौटी तो काफी ऐसी भी रही जिन्होंने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया। इमरजेंसी के मरीजों के साथ ही महिला चिकित्सक डॉ. अज्ञा राठौड़ ने कुछ ओपीडी के मरीजों की भी जांच की।
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यूं बिगड़ी है अस्पताल की व्यवस्थाएं
अस्पताल में कुछ समय पूर्व पांच महिला रोग विशेषज्ञ थी। इनमें एक महिला चिकित्सक डॉ. शिल्पा को डेपुटेशन पर दादरी भेजा गया है। डॉ. दिव्या लंबी छुट्टी पर है। डॉ. सुनीता बीती सात दिसंबर को 17 दिसंबर तक के अवकाश पर चली गई। डॉ. अज्ञा राठौर ने छुट्टियों के बाद 11 दिसंबर को ही ज्वाइन किया है। सात दिसंबर को ही अत्यधिक वर्कलोड ओपीडी, मैटरनिटी और इमरजेंसी ड्यूटी के कारण महिला चिकित्सक डॉ. सीमा ने रिजाइन कर दिया। ऐसे में अब ओपीडी, मैटरनिटी की सारी जिम्मेदारी डॉ. अज्ञा राठौर के जिम्मे है। इन ड्यूटी के साथ उनकी इमरजेंसी ड्यूटी भी लगाई जा रही है।
हमने चार चिकित्सक इमरजेंसी में फिल्ड से दे रखे है। एसएलसी में चार, जिसमें एक बाल रोग विशेषज्ञ भी है एनस्थिसिया में दो, एनआरसी में एक चिकित्सक जिला अस्पताल को दिया हुआ है। इसके अलावा हमने अपने स्तर पर मुख्यालय में चिकित्सकों की रिक्वायरमेंट भेजी हुई है। अस्पताल में एक ही महिला रोग विशेषज्ञ थी तो उनकी इमरजेंसी ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए थे, बल्कि किसी पुरुष चिकित्सक की ड्यूटी लगाई जा सकती थी।
- डॉ. आदित्यस्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। इमरजेंसी काफी अहम रहती है और इमरजेंसी में जिस चिकित्सक की ड्यूटी थी, वह अवकाश पर है। इमरजेंसी में सीरियस मरीज आते है और इमरजेंसी में चिकित्सक बेहद जरूरी है। इसी कारण महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अज्ञा राठौर की ड्यूटी लगाई गई थी। चिकित्सकों की रिक्वायरमेंट संबंधित पत्र मुख्यालय भेजा हुआ है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है और उनके छुट्टी पर जाने पर व्यवस्थाएं बिगड़ रही है। उच्च अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवाया गया है।
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डॉ. रघुवीर शांडिल्य, कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी सामान्य अस्पताल
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