08 फोटो नागरिक अस्पताल की ओपीडी में लगी भीड़।
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सामान्य अस्पताल में पिछले पांच दिन से कोई भी महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में ओपीडी में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने से हर रोज 250 से अधिक महिलाएं बिना इलाज के घर लौट रही है। मगर सबसे गंभीर बात जच्चा-बच्चा वार्ड में है। यह वार्ड पूरी तरह स्टाफ नर्स पर निर्भर है। स्टाफ नर्स सामान्य डिलिवरी करवा रही है मगर ऐसे केस जिनमें चिकित्सक की जरूरत है, उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर किया जा रहा है। जच्चा-बच्चा वार्ड में महिला रोग विशेषज्ञ न होना जच्चा-बच्चा की जिंदगी से भी खिलवाड़ है। अब स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट चिकित्सक को हायर करने की तैयारी कर रहा है।
सामान्य अस्पताल में कहने को तो चार महिला चिकित्सक हैं मगर किसी ने किसी कारण से अवकाश पर हैं। वर्कलोड के कारण बीती सात दिसंबर को एक महिला चिकित्सक डॉ. सीमा ने रिजाइन कर दिया। इसके बाद से सामान्य अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं और ओपीडी में आने वाली महिला मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सात तारीख के बाद से सामान्य अस्पताल में करीब 30 डिलिवरी हुई है। 15 गर्भवती महिलाओं को पीजीआई रोहतक रेफर किया जा रहा है। मगर चिंताजनक बात यह है कि डिलिवरी के दौरान यदि किसी गर्भवती की तबीयत बिगड़ जाए तो यह जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
हर महीने होते हैं 100 सिजेरियन केस : सामान्य अस्पताल में हर महीने 100 के करीब सिजेरियन ऑपरेशन होते हैं। अब महिला चिकित्सक नहोने के कारण पिछली सात दिसंबर के बाद से कोई भी सिजेरियन नहीं हुए है। ऐसे में स्टाफ नर्स महिलाओं को पीजीआई रोहतक रेफर कर रहे हैं। यहीं कारण है कि एंबुलेंस में डिलिवरी होने के भी मामले सामने आ रहे हैं।
इमरजेंसी ड्यूटी पड़ रही भारी : महिला चिकित्सक के लंबी छुट्टी जाने या रिजाइन करने के बाद वर्क लोड सामने आ रहा है। दरअसल महिला चिकित्सक को ही ओपीडी संभालनी पड़ती है और उन्हीं को जच्चा-बच्चा वार्ड और सिजेरियन। इन सबके अलावा भी चिकित्सकों की कमी के कारण महिला विशेषज्ञों की इमरजेंसी में भी ड्यूटी लगाई जा रही है।
अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। एनएचएम में महिला चिकित्सक हायर करने का भी प्रावधान है और प्राइवेट चिकित्सक को हायर कर व्यवस्था बनाई जाएगी।
- डॉ. कृष्ण कुमार, कार्यकारी सिविल सर्जन
चिकित्सकों की कमी है और इस बारे उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। प्राइवेट चिकित्सक हायर करने के अधिकार सिविल सर्जन के पास है।
- डॉ. रघुवीर शांडिल्य, कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी