फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले के 32 स्कूल के बच्चों की पीठ पर तय सीमा से ज्यादा वजन

विज्ञापन
विज्ञापन
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रडार पर अब भिवानी जिले के 32 ऐसे स्कूल आ गए हैं, जिनके अंदर पढ़ाई करने वाले बच्चों की पीठ पर निर्धारित वजन से डेढ़ गुणा बोझ लादा गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जिले के 32 निजी स्कूलों में निर्धारित बस्ते के वजन से डेढ़ गुणा तक पाठयक्रम की पुस्तकों के वजन मामले में कार्रवाई के लिए हरियाणा स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार द्वारा शिक्षा विभाग को इस मामले में शिकायत दी थी। जिसके बाद उप जिला शिक्षा अधिकारी की अगुवाई में टीम ने 32 स्कूलों के अंदर पहुंचकर पाठयक्रम संबंधी मामले की जांच की थी। हरियाणा में चल रहे सीबीएसई व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्धता रखने वाले निजी विद्यालयों के अंदर एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठयक्रम की पुस्तकें ही पढ़ाना अनिवार्य किया हुआ है। इसके अलावा निजी प्रकाशकों की किताबें निजी स्कूलों में किसी भी सुरत में नहीं लगाए जाने की सख्त हिदायतें हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने आठ अप्रैल 2019 को मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की पाठय पुस्तकें लगाए जाने व निर्धारित वजन से अधिक बस्ते का बोझ बच्चों की पीठ पर लादे जाने पर कार्रवाई की मांग की गई थी। इस शिकायत पर शिक्षा विभाग ने अधिकारियों एक कमेटी उप जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में गठित की गई। जिसने संबंधित निजी स्कूलों के अंदर जाकर पाठयक्रम से सम्बंधित मामले की जांच पड़ताल की। कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट 15 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी। इस जांच रिपोर्ट में उप जिला शिक्षा अधिकारी की कमेटी द्वारा सभी निजी स्कूलों के निरीक्षण में बच्चों के बस्ते का वजन निर्धारित वजन से डेढ़ गुणा दर्शाया है, जबकि इन स्कूलों में बच्चों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकें भी पढ़ाई जा रही थी। जिसका हवाला भी जांच रिपोर्ट में दिया गया है। इस जांच रिपोर्ट को जिला शिक्षा अधिकारी ने सीबीएसई बोर्ड व हरियाणा सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय को भेजा है। वहीं अब इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी कड़ा संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव को संबंधित विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा निमावली के अंतर्गत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

बच्चों पर बढ़ रहा है अनावश्यक मानसिक व शारीरिक तनाव
बस्ते के बोझ का निर्धारण मानव संसाधन मंत्रालय ने कई पहलुओं की जांच के बाद निर्धारित किया था। निजी स्कूल अपने फायदे के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें बच्चों पर थोंप रहे हैं, जिससे उनके बस्ते का बोझ कई गुणा बढ़ गयाहै। बृजपाल परमार ने बताया कि बच्चे भारीभरकम वजन तले दबकर मानसिक व शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। अभिभावक भी न चाहते हुए निजी स्कूलों की मनमानी के आगे घुटने टेक रहे हैं, क्योंकि उन्हें सिर्फ अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता है, जबकि निजी स्कूल केवल अपना फायदा ही ढूंढ रहे हैं, ऐसे स्कूलों पर मानव संसाधन मंत्रालय व शिक्षा विभाग सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें