शतरंज प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे प्रतिभागी।
भिवानी। अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस पर भारत सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सभी 22 जिलों में 20 जुलाई को शिक्षकों के लिए शतरंज प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश दिए थे लेकिन भिवानी में शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते यह आयोजन नहीं हो सका। प्रतियोगिता की तैयारियों के बिना ही प्रतिभागियों को खाली हाथ लौटना पड़ा, जिससे सैकड़ों शिक्षक खिलाड़ियों में भारी निराशा फैल गई।
हरियाणा शतरंज एसोसिएशन (एचसीए) के प्रदेश महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने बताया कि प्रतियोगिता के लिए जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्राचार्यों को 18 और 19 जुलाई को पत्र जारी कर 20 जुलाई को कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। आयोजन स्थल के रूप में राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भिवानी निर्धारित किया गया था। इन्हीं आदेशों के तहत लोहारू, सिवानी, तोशाम, बवानीखेड़ा और अन्य दूरदराज क्षेत्रों से शिक्षक खिलाड़ी सुबह से ही आयोजन स्थल पर पहुंचने लगे थे। लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद भी न तो आयोजन शुरू हुआ, न ही कोई आधिकारिक सूचना दी गई। इससे महिला और पुरुष दोनों वर्गों के प्रतिभागियों में रोष देखा गया।
महिला खिलाड़ियों ने इसे उपेक्षा और अपमान की संज्ञा देते हुए विरोध दर्ज कराया और शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रतिभागियों का कहना था कि उन्हें बिना किसी सूचना या समुचित व्यवस्था के घंटों इंतजार करवाया गया, जो प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। ब्रह्मचारी कुलदीप ने विभागीय उदासीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह न सिर्फ प्रतिभागियों के साथ अन्याय है बल्कि सरकार की नीति की भी अनदेखी है। उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और प्रतियोगिता को दोबारा आयोजित किया जाए, ताकि शिक्षकों की मेहनत और उत्साह का सम्मान हो सके।