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Bhiwani News: 18 करोड़ खर्च कर सीईटीपी बनाया ढाई साल बाद भी पर्यावरण एनओसी में उलझा, बारिश में औद्योगिक सेक्टर में फिर होगा जलभराव

Mon, 23 Jun 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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औद्योगिक क्षेत्र में बनाया गया सीईटीपी।
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भिवानी। औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में 18 करोड़ रुपये की लागत से बना कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) ढाई साल में भी चालू नहीं हो पाया है। इसकी वजह हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को सीईटीपी चलाने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी नहीं मिलना है। इस मानसून के सीजन में औद्योगिक सेक्टर बारिश में फिर जलभराव झेलेंगे।
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पर्यावरण एनओसी न मिलने के कारण दोनों औद्योगिक सेक्टरों से दूषित पानी की निकासी का मामला उलझा है। ऐसे में अब सीईटीपी के संचालन को लेकर हरियाणा सरकार नई कमेटी का गठन करेगी, क्योंकि पुरानी कमेटी को भंग कर दिया है। नई कमेटी गठन के बाद ही सीईटीपी संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
भिवानी के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में सीवर के दूषित पानी की निकासी और बरसाती पानी की निकासी के लिए जनवरी 2023 में करीब 18 करोड़ की लागत से कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बनकर तैयार हो गया था। पहले इसे बिजली कनेक्शन को लेकर चालू करने की चुनौती बनी, अब हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण एनओसी बाधा बन गई है।
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हालांकि ढाणा रोड के पास कुछ हिस्से में ड्रेन तक की लाइन में भी कई जगह लीकेज अभी दूर नहीं हुई है। रोहतक रोड पालुवास मोड़ पर बना पांच एमएलडी की क्षमता का सीईटीपी दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के जरिये ढाणा रोड के सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट की ड्रेन से जुड़ा है। इससे औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी ट्रीटमेंट के बाद खेतों में सिंचाई के लिए पहुंचना है। लेकिन सीईटीपी से ढाणा रोड की ड्रेन तक की लाइन कई जगह ठप पड़ी है।
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नौ एमएलडी डिस्पोजल की हालत भी बिगड़ी
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का रोहतक रोड सब्जी मंडी के पास विकास नगर में नौ एमएलडी क्षमता का डिस्पोजल है। ये डिस्पोजल काफी पुराना है। इसके आसपास का इलाका तेजी से विकसित हुआ है। ऐसे में इस डिस्पोजल पर पहले से ही दूषित और बारिश के पानी की निकासी का दबाव है। ऐसे में औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के दूषित पानी की निकासी का अतिरिक्त दबाव भी ये डिस्पोजल झेल रहा है। बारिश में तो ये डिस्पोजल खुद ही डूब जाता है, जिसे अतिरिक्त पंपिंग मशीन लगाकर पानी की निकासी दूसरी जगह करानी पड़ती है। ऐसे में ये डिस्पोजल रोहतक गेट के आसपास की कॉलोनियों से लेकर पालुवास मोड़ के औद्योगिक सेक्टरों की करीब 250 औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी की निकासी का जिम्मा भी झेल रहा है।



डेढ़ साल बाद दो से तीन फीट मिट्टी खोदाई करके निकाले बरसाती नाले

औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में करोड़ों के बजट से बरसाती नालों का निर्माण कराया गया था। ताकि बरसाती पानी की निकासी सीईटीपी के जरिए ढाणा रोड की ड्रेन तक की जा सके। करीब डेढ़ साल से एचएसवीपी अधिकारियों ने इसकी कोई सुध नहीं ली। अब मानसून सिर पर है तो एचएसवीपी इनकी सफाई करा रहा है। सेक्टर 26 में बरसाती नालों को ढूंढने के लिए जेसीबी ने ढाई से तीन फीट मिट्टी की खोदाई करके बरसाती नालों को निकाला है। ये नाले गंदगी से अटे पड़े हैं, जिनकी सफाई कर गंदगी को सड़क पर खुले में ही डाला जा रहा है। इनके ऊपर का बेड भी कई जगह से टूट चुका है। ऐसे में ये बरसाती नाले मानसून की बारिश कैसे झेल पाएंगे।



बरसाती नालों की अधिकारियों ने नहीं ली सुध : ईश्वर मान

पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने औद्योगिक सेक्टर 26 में सफाई कराने के दौरान भूमि के नीचे दबे नालों को निकाला। उन्होंने यहां की बदहाली का वीडियो बनाकर उच्चाधिकारियों को शिकायत दी है। ईश्वर मान ने आरोप लगाया कि एचएसवीपी में भ्रष्टाचार फैला है, जिसकी वजह से करोड़ों रुपयों का बजट खर्च करने के बावजूद भी तीन साल से दूषित पानी की निकासी नहीं हो पा रही है वहीं बारिश के पानी की निकासी का भी कोई बंदोबस्त नहीं है।





बरसाती नालों की सफाई का काम चल रहा है

औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट संचालन के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य है। इसी को लेकर हरियाणा सरकार द्वारा नई कमेटी का गठन किया जाना है, पुरानी कमेटी भंग कर दी गई है। जिसके बाद ही इसके संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। फिलहाल विकास नगर डिस्पोजल में सेक्टरों के गंदे पानी की निकासी कराई जा रही है। सेक्टर 21 और 26 के बरसाती नालों की सफाई का काम चल रहा है।

-भूपेंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एचएसवीपी भिवानी।

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अधिकारी नियमों पर ध्यान नहीं दे रहे
औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए सीईटीपी निर्माण के ढाई साल बाद भी चालू नहीं हो पाया है। इसकी वजह अधिकारियों की मनमानी और सही तरीके से काम नहीं करना है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ भी बैठक कराई गई थी, लेकिन एचएसवीपी के अधिकारी नियमों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मानसून के दौरान औद्योगिक सेक्टरों के अंदर बरसाती जलभराव होता है, जिससे उद्योग मालिकों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है जबकि दूषित पानी की निकासी नहीं होने से सीवर ठप पड़े हैं।
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-शैलेंद्र जैन, अध्यक्ष, जिला भिवानी उद्योग संघ।
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