भिवानी। करीब 11 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ औद्योगिक सेक्टर का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) डेढ़ साल से बंद पड़ा है। हालांकि इसके अंदर बिजली का कनेक्शन भी चालू हो गया है और सीईटीपी से खेतों तक भूमिगत पाइप लाइन भी डाली जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में गंदे पानी की निकासी नहीं हो रही है। वहीं बरसाती पानी की निकासी के लिए भी यहां अलग से सिस्टम बनाया हुआ है।
बता दें कि निर्माण के बाद टेस्टिंग के दौरान ही सीईटीपी से खेतों में डाली गई लाइन पंक्चर हो गई थी, जिसे अब ठीक करने वाली एजेंसी भी गायब है। वहीं औद्योगिक सेक्टरों की करीब डेढ़ सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला कैमिकल युक्त गंदा पानी सीवर से ओवरफ्लो होकर ग्रीन बेल्ट की हरियाली को भी चौपट कर रहा है। वहीं बारिश के पानी की निकासी भी नहीं होने से औद्योगिक इकाइयों के अंदर भी जलभराव हो रहा है।
भिवानी के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में सीवरेज के पानी की निकासी और बरसाती पानी की निकासी के लिए जनवरी 2023 में करीब 11 करोड़ की लागत से कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बनकर तैयार हो गया था। शुरूआत में इसे बिजली कनेक्शन को लेकर चालू करने में ही देरी हो रही थी। यहां पर बिजली के अलावा अब जनरेटर यानी डीजी सेट भी लग चुका है। सीईटीपी पूरी तरह से काम करने लगा। लेकिन जब इसकी टेस्टिंग की गई तो इसी दौरान ढाणा रोड पर गंदे पानी की निकासी के लिए डाली गई लाइन पंग्चर हो गई। इसे एजेंसी ने अब तक ठीक नहीं किया।
वहीं अधिकारियों ने भी इसे ठीक कराने में प्रयास तो किए, मगर जिस एजेंसी ने लाइन डाली थी अब वह ही गायब है। ऐसे में सीईटीपी पिछले डेढ़ साल से बंद पड़ा है। करोड़ों रुपयों का बजट खर्च किए जाने के बावजूद भी औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी निकासी नहीं हो पा रहा है। इस वजह से दोनों ही औद्योगिक सेक्टरों के सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं।
पांच एमएलडी क्षमता का सीईटीपी दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के जरिए ड्रेनेज से जोड़ा
रोहतक रोड पालुवास मोड़ पर बना पांच एमएलडी की क्षमता का सीईटीपी दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के जरिये ढाणा रोड के सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट की ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ा है। इससे औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी ट्रीटमेंट के बाद वहां खेतों में सिंचाई के लिए पहुंचना है। लेकिन सीईटीपी से ढाणा रोड की ड्रेनेज तक की लाइन पंक्चर यानी ठप पड़ी है। इसमें गंदे पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। जब तक इस लाइन को ठीक नहीं किया जाता तब तक सीईटीपी पूरी तरह से काम नहीं कर पाएगा।
बारिश में विकास नगर डिस्पोजल तक पहुंच रहा बारिश और सीवर का गंदा पानी
नया बस स्टैंड से अग्रसेन चौक तक सीसी सड़क काफी ऊंची हो गई है, जबकि विकास नगर नीचा पड़ गया है। ऐसे में आसपास के इलाके का काफी बारिश का पानी विकास नगर डिस्पोजल तक पहुंच रहा है। इसकी निकासी में ही नौ एमएलडी क्षमता का डिस्पोजल हांफने लगता है। ऐसे में पड़ोस में औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 का बरसाती पानी भी इसी डिस्पोजल का रुख कर रहा है। इससे यहां डिस्पोजल पर पानी की निकासी भी नहीं हो पा रही है। विकास नगर डिस्पोजल को भी जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अपग्रेड करने की योजना बना रहा है, मगर अभी तक ये मामला सिरे नहीं चढ़ा है।
सेक्टर 21 और 26 के लिए बनाया गया कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह से काम कर रहा है। लेकिन पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज तक डाली गई लाइन में कुछ दिक्कत है। इसको लेकर जल्द समाधान कराया जाएगा। बरसाती डिस्पोजल ठीक से काम कर रहा है। दोनों ही औद्योगिक सेक्टरों के अंदर हाल ही में बड़े स्तर पर विकास के काम कराए गए हैं।
-भूपेंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एचएसवीपी भिवानी।
औद्योगिक सेक्टरों के लिए बना सीईटीपी कहने को तो चालू हो चुका है, लेकिन अभी तक इससे सीवरेज के पानी की निकासी नहीं हो रही है। इसकी वजह ड्रेनेज तक डाली गई लाइन ठप है, जिसे ठीक नहीं कराया गया है। जब तक ये लाइन चालू नहीं होगी तब तक दोनों सेक्टरों के अंदर गंदे पानी की निकासी नियमित नहीं होगी। बारिश में औद्योगिक इकाइयों के अंदर भी पानी जमा हो जाता है। नगर परिषद के सफाई कर्मचारी भी औद्योगिक सेक्टरों के अंदर सफाई के लिए नहीं आते हैं। करोड़ों रुपयों का बजट खर्च किए जाने के बाद भी नतीजा शून्य है।
-शैलेंद्र जैन, अध्यक्ष, जिला भिवानी उद्योग संघ भिवानी।