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नहरें सूखी और जलघरों में बचा तीन दिन का पानी

Sun, 07 May 2017 01:37 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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नहर में पानी नहीं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले की नहरें बिल्कुल सूखी पड़ी हैं और जलघरों में भी महज तीन दिन का पानी बचा है। ऐसे में अगले सप्ताह से शहर में पेयजल संकट गहराने के आसार है। विभाग इस समय मजबूरीवश बोरिंग ट्यूबवेलों का लवणीय पानी मिलाकर पेयजल सप्लाई घरों में छोड़ रहा है। इतना ही नहीं अब विभाग एक दिन छोड़कर एक दिन शहर में पानी की आपूर्ति कर रहा है।
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कुछ वार्डों व कॉलोनियों में पेयजल संकट गहराने से लोगों को परेशानी हो रही है। दूसरी तरफ सिंचाई विभाग के अधिकारी नहरी पानी के लिए इंडेंट भेजने का तर्क तो दे रहे हैं लेकिन पानी आने का निश्चित समय अभी पता नहीं चल पाया है। ऐसे में तीन दिन बाद में शहर में पेयजल को लेकर हाहाकार मच सकता है।

जानकारी के अनुसार शहर की रोजाना पेयजल खपत करीब 12 लाख लीटर है। विभाग इस समय ट्यूबवेल का पानी मिलाकर सप्लाई कर रहा है।  यह पानी लवणीय है और पीने  जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व  मौजूद नहीं है। जनस्वास्थ्य विभाग के पास इस समय नौ बोरिंग ट्यूबवेल हैं। गत 18 अप्रैल को नहरों में पानी बंद हो गया था।
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उस दौरान दोनो जलघरों में पानी डाला गया था। शहर के दोनो जलघरों में पेयजल की क्षमता 15 दिन की ही है। पहले नहरों में भी पानी हर 15वें दिन  छोड़ा जाता था। अब शहर के दोनों जलघरों में केवल तीन दिन का पानी बचा है। तीन बाद  विभाग पूरी तरह से ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति पर निर्भर हो जाएगा। वहीं शहर में दो जलघर हैं एक गांव रामनगर के समीप और दूसरा चंपापुरी कालोनी में स्थित है। चंपापुरी जलघर की क्षमता 2400 लाख लीटर हैं जबकि रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है।  दोनो जलघरों में महज तीन दिन का पानी बचा है। विभाग कर्मचारी इस समय ट्यूबवेल का पानी मिलाकर सप्लाई कर रहे हैं लेकिन यह भी कुछ दिन के लिए ही संभव होगा।

नहरों में पानी आपूर्ति की समयावधि भी हुई कम
 नहरों में जहां पहले पानी 15 दिन में छोड़ा जाता था तथा 15 दिन बंद रहता था वहीं अब 16 दिन पानी मिलता है 24 दिन पानी बंद रहता है। ऐसे में शहर ही नहीं गांवों में भी पेयजल आपूर्ति चरमरा जाती है। गांवों में लोग जैसे-तैसे ट्यूबवेल व कुओं के जरिए पानी की आपूर्ति कर काम चला लेते हैं। इस समय सिंचाई विभाग ने पानी का इंडेंट भेज रखा है। 600 क्यूसेक पानी की डिमांड कर रखी है।

पानी आपूर्ति  टिकी बोरिंग ट्यूबवेलों पर
शहर की पेयजल आपूर्ति  बोरिंग ट्यूबवेलों पर ही  निर्भर रह गई है। दोनो जलघरों में नौ ट्यूबवेल लगे हैं जिनमें से अधिकतर का पानी लवणीय बना हुआ है। एक ट्यूबवेल का पानी खराब होने पर विभाग जलघर के आसपास ही दूसरा ट्यूबवेल  बोरिंग कर जैसे -तैसे काम चलाता है। इन ट्यूबवेल के पानी  की गुणवत्ता नहरी पानी की तुलना में 50 फीसदी कम आंकी जा रही है। अगर ट्यूबवेल के पानी को  पूरी प्रक्रिया से फिल्टर कर दिया जाता है तो इसमें व्याप्त सभी  प्राकृतिक तत्व खत्म होने लगते हैं जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। इतना ही नहीं ट्यूबवेलों के जरिए लंबे समय तक भी पानी की आपूर्ति संभव नहीं है। इनकी पेयजल आपूर्ति क्षमता काफी कम होती है।

पानी की बर्बादी भी प्रमुख कारण
 शहर में रोजाना करीब दो लाख लीटर पानी की बर्बादी भी हो रही है। सर्विस स्टेशनों के अलावा लोग सुबह -सांय मकान के  बाहर गलियों  व घरेलू बगीचियों में भी पानी का छिड़काव करते हैं। अधिकतर लोगों की पेयजल टंकी  ओवरफ्लो होने पर पानी की बर्बादी होती है। शहर में कई जगह पेयजल लाइन भी लीकेज हैं। जिससे पानी की बर्बादी के साथ-साथ प्रेशर भी कम होता है।

 जलघरों में सात फुट तक जमी गाद
 शहर के वाटर टैंकों में इस समय छह से सात फीट तक गाद एवं मिटटी का जमाव बना हुआ है जिससे इतनी जगह में लाखों  लीटर पानी अतिरिक्त रूप से  स्टोर हो सकता है। अगर इन टैंकों की  नयिमित रूप से छंटाई होती रहे तो पानी की स्टोरेज क्षमता और बढ़ाई जा सकती है।
बाक्स==अधिकतर शहर में प्राइवेट पानी की आपूर्ति
इस समय बाजारों व घरों में प्राइवेट पानी की सप्लाई का सहारा लिया जा रहा है। लोग टैंकर या  प्राइवेट पानी का इस्तेमाल कर काम चला रहे हैं।  पानी का एक टैंकर 400 रुपये तक बिक रहा है। दुकानदार भी प्राइवेट सप्लायर के जरिए पानी की कैन रखवा रहे हैं।
बाक्स: पेयजल सप्लाई न आने पर उठाने पड़ेंगी शारीरिक व आर्थिक परेशानियां
--शहरवासी नवीन ने बताया कि पेयजल किल्लत के कारण प्रतिदिन समस्यों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में नहाने के लिए भी पानी नहीं है। पीने का पानी न होने से पानी के कैंपर लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
--शहरवासी टिनू ने बताया सप्ताह में तीन से चार पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे है। एक टैंकर पर 500 सौ रूपये देने पड़ रहे है। विभाग को पूर्ण रूप से पेयजल सप्लाई करनी चाहिए जिससे लोगों की समस्या कम हो।
-- दीपक ने बताया विभाग के पानी छोड़ने का कोई टाइम फिक्स नहीं है। जनस्वास्थ्य विभाग कर्मचारी कभी रात को तो कभी दिन में पानी छोड़ देते है। लोगों को पानी के टाइम टेबल का पता न होने के कारण घरों में पेयजल सप्लाई नहीं हो पाती।
-- वेदपाल विभाग सप्ताह में केवल दो-तीन बार ही पानी छोड़ पा रहा है। विभाग बहुत ही कम मात्रा में पानी छोड़ रहा है। लभोगों को रावलधी व रामनगर से साईकिल व गाड़ियों में पानी लाना पड़ रहा है।
-==वर्जन--
 जब तक पानी है काम चलाया जा रहा है। नहरों में पानी छोड़नेपर समस्या दूर हो जाएगी।  शहर में पानी की कमी नहीं आने दी जाएगी। हम बोरिंग ट्यूबवेलों का सहारा लेकर काम चला रहे हैं।
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 एसडीओ रामपाल, जनस्वास्थ्य विभाग
वर्जन::
हमने नहरी पानी के लिए इंडेंट भेज दिया है। जल्द पानी मिलने की संभावना है। नहरों में पानी आते ही जलघरों को पहले भरवा देंगे।
आनंद कुमार, सिंचाई विभाग प्रवक्ता
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