गांव सैय में नहर टूटने से करीब एक सौ एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई और खेतों में दो से तीन फुट तक पानी भर गया। पानी भरने से धान की फसल बर्बाद हो गई और किसानों को भारी नुकसान हुआ।
पानी भरने से आगामी फसल की भी बिजाई भी मुश्किल हो गई है। किसानों ने प्रदेश सरकार से बर्बाद फसल के मुआवजे की मांग की है।गांव सैय के खेतों से होकर गुजरने वाली भिवानी डिस्ट्र्रीब्यूट्री (नहर) पर बुर्जी न. 132580 के पास सोमवार रात एक बजे नहर टूटने से करीब 100 एकड़ खेतों में पानी भर गया।
इन खेतों में धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी। माइनर की पटरी में करीब पांच फुट चौड़ी दरार आने के कारण नहर टूट गई और खेत जलमग्न हो गए। खेतों में दो से तीन फुट तक पानी भरा हुआ है। धान की फसल में ज्यादा मात्रा में पानी भरने के कारण इस बार गेहूं की बिजाई भी होना मुश्किल है।
किसान पप्पु गुर्जर, राजबीर, सत्तु, सतबीर, अमरसिंह, दलीप, चन्द्र सिंह, किरोड़ी, रामकिशन, रोहताश, धर्मबीर, सत्यवान, धनपत सिंह, संतकुमार, जयभगवान ने बताया कि यह नुकसान विभाग की लापरवाही के कारण हुआ है।
किसानों ने बताया कि यह माइनर किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। करीब छह माह के अंतराल में यह माइनर करीब तीन बार टूट चुकी है, लेकिन विभाग इस बात से कोई सबक नही ले रहा है।
उन्होंने बताया कि तीनों बार यह माइनर ज्यादा पानी आने के कारण टूट चुकी है और हर बार किसानों को भारी नुकसान होता है। किसानों ने बर्बाद हुई धान की फसल की विशेष गिरदावरी करके मुआवजे की मांग की है।