जिला अस्पताल की इमरजेंसी में चिकित्सक और स्टाफ नर्स होने के बावजूद सुरक्षा कर्मी द्वारा एक मरीज की मरहम पट्टी करने का मामला सामने आया है।
शनिवार रात करीब नौ बजे अलग-अलग सड़क हादसों के घायल तीन युवक अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सक ने पर्ची देख इलाज लिख दिया और स्टाफ नर्स को इंजेक्शन और मरहम पट्टी के निर्देश दिए। इसी दौरान वेंटिलेटर पर भर्ती एक मरीज की स्थिति देखने में चिकित्सक व स्टाफ नर्स व्यस्त हो गए और इमरजेंसी की ओटी में भर्ती मरीज को भूल गए।
वहां मौजूद सुरक्षा कर्मी ने ही घायलों की मरहम पट्टी की। ऐसा पहली बार नहीं अक्सर सामान्य अस्पताल की माइनर ओटी में सुरक्षा कर्मियों, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मरीजों की मरहम पट्टी करते देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, कुछ प्राइवेट लैब के कारिंदे भी सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचकर मरीजों को मरहम पट्टी करते है। घायलों को टांके लगाने व इंजेक्शन लगाने तक से गुरेज नहीं करते। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी मरीज के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
डा. श्रीराम सिवाच, पीएमओ सामान्य अस्पताल का कहना है कि सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में 24 घंटे चिकित्सक, स्टाफ नर्स, नर्सिंग स्टूडेंट्स रहती है। मरहम पट्टी का काम नर्स का है। अगर सुरक्षा कर्मी या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मरहम पट्टी करते है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।’’