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अन्य प्रदेशों में जाने के लिए बहनों के लिए नहीं मिलेंगी रोडवेज की बसें

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बस स्टैंड परिसर में अपने बूथों पर खड़ी बसें। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
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इस बार पंजाब, दिल्ली, हिमाचल, मध्यप्रदेश, बिहार राज्यों में अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें रोडवेज बसों का सफर नहीं कर पाएंगी। इतना ही नहीं रोडवेज बसों में किराया चुकाकर ही बहनें अपने मायके तक भाई की कलाई पर प्यार बांधेंगी, जबकि पिछले साल सरकार की घोषणा के अनुसार अकेले भिवानी जिले से करीब 50 हजार महिलाओं व बच्चों ने रोडवेज बसों में मुफ्त सफर किया था।
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हालांकि कोविड-19 की वजह से रोडवेज विभाग ने सीमित बसों का ही संचालन शुरू किया हुआ है। लेकिन रक्षाबंधन पर बहनों की सुविधा के लिए रोडवेज विभाग पूरा अमला चलाने की तैयारी में है। इसलिए रेस्ट पर भेजे कर्मचारियों को भी कॉल कर ड्यूटी पर बुला लिया है। निजी क्षेत्र में परिवहन समितियों को भी एक चौथाई निजी बसों के संचालन की अनुमति है। इसके लिए आरटीए द्वारा बाकायदा बसों की रोटेशन के लिए नंबर जारी किए हुए हैं। निजी बसें भी एक सप्ताह में केवल एक ही दिन चल रही हैं।
भिवानी डिपो में करीब 120 बसें भिवानी बस स्टैंड और करीब 47 बसें तोशाम सब डिपो में हैं, लेकिन कोविड-19 की वजह से रूटों पर केवल 80 रोडवेज बसें ही दौड़ लगा रही हैं। जबकि रोडवेज के कर्मचारी भी रेस्ट पर भेजे गए हैं। उन्हें जरूरत के हिसाब से ड्यूटी पर बुलाया जा रहा है। लेकिन अब पूरे स्टाफ को ड्यूटी पर वापस लौटने के आदेश रोडवेज विभाग ने किए हैं। जिससे की सभी बसों का संचालन संभव हो सके। कोविड के कारण 25 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद से ही बसों का संचालन बंद पड़ा था। अब लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे धीरे परिवहन सेवाएं भी लोकल रूटों पर बहाल की गई। तीन जून को रोडवेज ने एक शहर से दूसरे शहर तक कई रूटों पर बस सेवाएं बहाल की थी। जिसके बाद कुछ रूटों पर बसों के रोटेशन भी बढ़ाए गए, मगर रोडवेज बसों में लोगों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। यही वजह है कि फिलहाल 80 बसों के सहारे ही रोडवेज जिले की परिवहन सेवाओं को चला रहा है।
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किलोमीटर स्कीम में आई 25 बसों के भी पहिये थमे, छह मिनी बसें लोकल लगा रही दौड़
सरकार ने परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किलोमीटर स्कीम के तहत भिवानी डिपो में 25 बसें भेजी थी। जिनके लॉकडाउन लगने के बाद से ही पहिये थमे हुए हैं। इन बसों को संचालन की कोई अनुमति नहीं मिली है, जबकि लॉकडाउन से कुछ अर्से पहले ही भिवानी परिवहन बेडे़ में शामिल हुई छह पिंक मिनी बसें लोकल रूटों पर दौड़ लगा रही हैं।
भिवानी डिपो की दूसरे राज्यों में नहीं जा रही कोई बस
भिवानी डिपो से कोई भी रोडवेज बस दूसरे या फिर पड़ोसी राज्यों में दौड़ नहीं लगा रही है। केवल राजस्थान और यूपी से सीमित रूटों पर ही कुछ बसें आ रही हैं। इनमें राजस्थान के झुंझनू, अजमेर, यूपी के मथुरा शामिल हैं। जबकि दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून, हरिद्वार और चुरु के लिए बस सेवाएं बंद हैं। पंजाब, हिमाचल, मध्यप्रदेश, बिहार राज्यों में बस सेवाएं बंद हैं।
सामान्य दिनों में सात से आठ लाख, अब ढाई से तीन लाख तक सिमटी आय
भिवानी डिपो की सामान्य दिनों में रोजाना की आमदनी सात से आठ लाख रुपये होती थी जो कभी विशेष मौकों पर दस से 12 लाख तक भी पहुंच जाती थी, लेकिन अब कोविड की वजह से रोजाना केवल ढाई से तीन लाख रुपये की यात्री रिसीट आ रही है। इससे रोजाना ही परिवहन विभाग को भी घाटा झेलना पड़ रहा है।
वर्जन-
रक्षाबंधन पर बहनों के लिए रोडवेज विभाग ने इस बार मुफ्त सर्विस नहीं दी हैं, लेकिन महिलाओं की सुविधाओं के लिए भिवानी डिपो की सभी बसों का संचालन होगा, इसके लिए पूरे स्टाफ को कॉल कर ड्यूटी पर बुलाया गया है। महिलाओं को मायके से रक्षाबंधन के बाद वापसी के लिए भी रोडवेज बस सर्विस मिलेगी। सामुदायिक दूरी और सैनिटाइज की व्यवस्था भी बस स्टैंड पर की गई है।
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- भरत सिंह परमार, जिला यातायात प्रबंधक
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